Saturday, 6 March 2021

यशराज की वजह से थिएटरों में लौटेगी रौनक...!

-दीपक दुआ
करीब साल भर से फाका झेल रहे सिनेमाघरों में पुरानी रौनकें लौटने वाली हैं। साल 2020 के मार्च महीने की 13 तारीख को इरफान वाली फिल्मअंग्रेजी मीडियमकी रिलीज़ के दिनों में ही विभिन्न राज्यों ने सिनेमाघर बंद करने शुरू कर दिए थे और फिर पूरे देश में लॉकडाउन के चलते सिनेमाघरों पर ताले ही लग गए थे। बाद में थिएटर खुले भी तो सख्त दिशा-निर्देशों, बड़ी फिल्मों की कमी और भीड़भाड़ से दूर रहने की ज्यादातार दर्शकों की कोशिशों ने इन्हें सफल नहीं होने दिया और बहुत सारे थिएटर फिर से बंद हो गए। लेकिन अब उम्मीद है कि सिनेमाघरों में पहले वाली रौनकें फिर से दिखेंगी। उम्मीद की यह रोशनी यशराज फिल्म्स के उस ऐलान के बाद आई जिसमें उन्होंने इस साल रिलीज़ होने वाली अपनी पांच बड़ी फिल्मों की तारीखें घोषित कीं। उनके इस ऐलान के बाद और भी कई निर्माताओं ने अपनी फिल्में थिएटरों में लाने की घोषणा कर डाली। तो आइए, यशराज की उन पांचों फिल्मों पर नज़र दौड़ा ली जाए, जो इस साल रही है-

Tuesday, 2 March 2021

रिव्यू-आऊटर पर खड़ी ‘द गर्ल ऑन द ट्रेन’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
रोज़ाना ट्रेन से सफर करने वाली एक वकील खिड़की में से एक घर को, उस घर में रह रहे जोड़े को, उनकी खुशहाली को देखती है। उसे अच्छा लगता है उन्हें सुखी देख कर। अपने बीते दिन याद आते हैं उसे। एक दिन वह उस लड़की के साथ किसी दूसरे मर्द को देखती है तो भड़क उठती है और शाम को उसे समझाने के इरादे से उसके घर जा पहुंचती है। इस मुलाकात के बाद उस लड़की की लाश मिलती है और उसके कत्ल का इल्ज़ाम इस वकील पर आता है जिसे भूलने की बीमारी है और यह भी याद नहीं कि असल में उस शाम को हुआ क्या था। अब पुलिस उसके पीछे है और एक अनजान आदमी भी उसे ब्लैकमेल कर रहा है जिसने कत्ल होते हुए देखा था। आखिर सच क्या है? क्यों हुआ यह कत्ल? किसने किया?
 

रिव्यू-वाजिब सवाल उठाती ‘वंदे भारत-होप टू सर्वाइवल’

-दीपक दुआ...
7 अगस्त, 2020... लॉकडाउन के चलते विदेशों में फंसे भारतीयों को लाने के लिए शुरू की गईंवंदे भारतउड़ानों में से एयर इंडिया की उड़ान संख्या आईएक्स1344 दुबई से उड़ी। इस हवाई जहाज की मंज़िल थी केरल का कोझिकोड यानी कालीकट अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा। कोरोना के डर से डरे-सिमटे 184 यात्रियों और 4 कर्मियों को लेकर दो पायलटों ने उड़ान भरी। दोनों पायलट खूब अनुभवी। बल्कि कैप्टन दीपक साठे तो वायुसेना में भी रह चुके थे। कोझिकोड पहुंचे तो अंधेरी रात, मूसलाधार बारिश और मौसम बेहद खराब। ऊपर से इस हवाई अड्डे का रनवे भी टेबल-टॉप। यानी किसी पहाड़ी पर मेज की ऊपरी सतह जैसा लंबा। पायलट दल ने तीसरी कोशिश में विमान रनवे पर उतारा लेकिन वह तय जगह तक रुक सका और गीले रनवे से फिसलता हुआ पहाड़ी के किनारे से नीचे जा गिरा। दोनों पायलट और 19 यात्री मारे गए। किसकी गलती से? पायलट कसूरवार थे, रनवे खराब था, मौसम की मार थी या कुछ और...?