Tuesday, 7 July 2020

‘गर्म हवा’ वाले एम.एस. सत्यु ने मुझे जो खत लिखा

-दीपक दुआ...
अपने पिछले आलेख में मैंनेगर्म हवाजैसी कालजयी फिल्म बनाने वाले एम.एस. सत्यु के उस खत का ज़िक्र किया था जो उन्होंने मेरे खत के जवाब में मुझे लिखा था और उसके करीब 17 साल बाद गोआ में मैंने उन्हें इसके लिए शुक्रिया कहा था। (वह आलेख यहां क्लिक करके पढ़ें)

दरअसल वह पत्र मैंने सत्यु साहब को अपने पत्रकारिता के कोर्स के प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक प्रश्नावली की शक्ल में भेजा था जिसमें मैंनेकला सिनेमाऔरव्यावसाहिक सिनेमाके वर्गीकरण, सिनेमा में आते बदलाव, उन्हें मिलते सरकारी प्रश्रय, सिनेमा के भविष्य आदि पर सवाल पूछे थे और सत्यु साहब ने प्रश्नावली के हर सवाल का अलहदा जवाब देने की बजाय अपने खत में उन सारे बिंदुओं पर अपनी बात रखी थी। उस पत्र का हिन्दी अनुवाद यह रहा :-

Monday, 6 July 2020

जब मैंने एम.एस. सत्यु को किया 17 साल पुराना शुक्रिया

-दीपक दुआ...
एम.एस. सत्यु-‘गर्म हवावाले एम.एस. सत्यु। सिर्फ यही एक फिल्म काफी है उनका परिचय देने के लिए, उन्हें विश्व सिनेमा के इतिहास में अमरत्व प्रदान करने के लिए। वही मैसूर श्रीनिवास सत्यु आज 6 जुलाई को नब्बे के हो गए। उन्हीं से जुड़ा मेरा एक यादगार संस्मरण जब मैंने उनसे कहा था-‘सर आपको 17 साल पुराना एक शुक्रिया अदा करना है...!’

Saturday, 4 July 2020

वेब-रिव्यू : अच्छा, टाइम-पास एंटरटेनमैंट देती ‘हंड्रेड’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
नेत्रा पाटिल को जाना है स्विट्जरलैंड लेकिन उसकी किस्मत में लिखी है एक सरकारी दफ्तर की क्लर्की। .सी.पी. सौम्या शुक्ला खुद को समझती है जेम्स बॉण्ड लेकिन डिपार्टमैंट ने उसे बना रखा है आइटम गर्ल। दोनों के सपने जुदा, दुनिया जुदा, ज़िंदगी जुदा, ज़िंदगी जीने का ढंग जुदा। एक जगह ये दोनों मिलती हैं और फिर साथ चलने लगती हैं। दरअसल नेत्रा मरने वाली है। उसके पास सिर्फ हंड्रेड डेज़ (सौ दिन) हैं। इस दौरान वह वो सब कुछ कर लेना चाहती है, जो उसने अभी तक नहीं किया। उसे अपनी बची हुई ज़िंदगी में एक्साइटमैंट चाहिए और यह एक्साइटमैंट उसे देती हैसौम्या मईडमअपनी मुखबिर बना कर।

Sunday, 28 June 2020

रिव्यू-उम्मीदों की रोशनी में ‘चिंटू का बर्थडे’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
2004 का बगदाद। इराक में अमेरिकी-ब्रिटिश सेना को घुसे हुए साल भर हो चुका है। राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के पकड़े जाने के बावजूद ये लोग यहां जमे हुए हैं। यहां रह रहे ज़्यादातर भारतीय अपने देश को लौट चुके हैं मगर नेपाली पासपोर्ट पर यहां पहुंचे मदन तिवारी का परिवार यहीं फंसा हुआ है। बम धमाके, गोलीबारी इनके लिए आम है। मदन के बेटे चिंटू का आज बर्थडे है। सारी तैयारियां हो रही हैं कि तभी हो-हल्ला शुरू हो जाता है। एक बम फटता है और तफ्तीश के लिए दो फौजी इनके यहां घुस आते हैं।

Saturday, 27 June 2020

रिव्यू-धीमे-धीमे कदम बढ़ाती ‘भोंसले’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
मुंबई शहर। गणपति उत्सव के लिए मूर्तियां सज रही हैं। दूसरी तरफ पुलिस कांस्टेबल गणपत भोंसले रिटायर हो रहा है। वह अकेला है, नितांत अकेला। जिस सस्ती-सी, पुरानी चाल में वह रहता है वहां बसे मराठियों को लगता है कि मुंबई सिर्फ उनकी है और यू.पी.-बिहार से आए ये भैये लोग जबरन यहां घुसे चले आ रहे हैं। टैक्सी-ड्राईवर विलास अपनी नेतागिरी चमकाने के लिए भोंसले भाऊ को अपनी तरफ खींचना चाहता है। उधर उत्तर भारतीय संघ वाले भी डटे हुए हैं। लेकिन भोंसले पर अपने आसपास की हरकतों का कोई खास असर नहीं होता। मगर एक दिन कुछ ऐसा होता है कि वह कदम उठाने को मजबूर हो जाता है।