-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
राघव पुणे पहुंचा है उस फ्लैट का सौदा करने जिसमें उसका बचपन बीता था। दीवार पर उसके माता-पिता की तस्वीरें टंगी हैं। यहां उसे वे पल याद आने लगते हैं जो उसने यहां बिताए थे। खासतौर से अपने पिता के साथ अपने रिश्ते और यादों को वह सहेजता है। वह उस पैक्ट यानी इकरारनामे को भी याद करता है जो उसके और उसके पिता के बीच हुआ था। क्या था वह इकरारनामा…?
फीचर फिल्मों और वेब-सीरिज़ की भीड़भाड़ में अच्छी शॉर्ट-फिल्में अक्सर छुप जाती हैं। एक वजह तो यही रहती है कि ज़्यादातर शॉर्ट-फिल्में किसी कायदे के प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ ही नहीं हो पातीं हैं। दूसरी वजह यह कि ज़्यादातर दर्शक भी इनके प्रति उदासीन रहते हैं जबकि सच यह है कि यदि अच्छे से बुनी-बनाई कहानी हो तो वह कुछ मिनटों में भी गहरी बात कह जाती है, जैसे यह फिल्म ‘द पैक्ट’ कह रही है।
इस फिल्म ‘द पैक्ट’ के निर्माता, लेखक और एडिटर अपूर्व असरानी के निजी जीवन के पलों से प्रेरित यह कहानी हमारे यहां के अधिकांश पिता-पुत्रों के बीच की संवादहीनता को रेखांकित करती है। पिता का सख्त रवैया बेटों को अक्सर खलता है और उनके बीच दूरियां आ जाती हैं। इन दूरियों के बीच पिता के त्याग अक्सर भुला दिए जाते हैं और याद रह जाती हैं तो उनकी सख्तियां। यही वजह है कि अक्सर घर से दूर रहने वाले बेटे भी पिता को नहीं मांओं को फोन करते हैं। लेकिन एक दिन ऐसा आ जाता है जब उनका फोन उठाने को पिता मौजूद ही नहीं रहते। बहुत कम संवादों में यह फिल्म हमें उस शून्य का अहसास करा देती है जिसे इस फिल्म का नायक महसूस कर रहा है और शायद उसके बहाने से हम सब।
डायरेक्टर लक्ष्मी आर. अय्यर ने बहुत ही नरमाई से दृश्यों को गढ़ा है। बिना किसी उतावलेपन के वह हौले-हौले दर्शक के मन में अपनी इस फिल्म का बीज रोपने में सफल रही हैं। एक फिल्मकार के लिए यह एक बड़ी सफलता होती है कि वह जो कहना चाहे, उसे बिना चीखे-चिल्लाए सामने वाले को सुनवा सके।
प्रमव्रत चटर्जी अपने ठहरे हुए अभिनय से प्रभावित करते हैं। उनके किरदार को तलाकशुदा न दिखाया जाता तो फिल्म अधिक गहरी हो सकती थी। कल्याणी मुले बहुत असरदार काम कर गईं। ब्रोकर बने रोशन चौहान को कुछ बढ़िया संवाद मिले और उन्होंने बढ़िया काम भी किया। वेदांत सिन्हा, शान सिकवानी, जयराज नायर, रमेश नायर सही रहे और रेणुका शहाणे ने अपनी आवाज़ से मौजूदगी जताई। एम. रविचंद्रन का कैमरा यथार्थ को पकड़ता रहा और आनंद भास्कर का संगीत दृश्यों को गाढ़ा करता रहा।
यू-ट्यूब पर रिलीज़ हुई 25 मिनट की यह फिल्म ‘द पैक्ट’ देखने के बाद मन भावुक हो उठता है। अपने पिता से बात करने का मन होता है, उनसे दूरी खलने लगती है। यह इस फिल्म की सफलता है।
(इस फिल्म को यू-ट्यूब पर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)
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Release Date-21 January, 2026 on YouTube
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ-साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब-पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)
