Saturday, 25 January 2020

रिव्यू-अरमानों से हल्का-सा ‘पंगा’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
कभी थी वो देश की कबड्डी टीम की कप्तान। आज उसके पास रेलवे की नौकरी है। पति भी रेलवे में इंजीनियर। एक प्यारा-सा बेटा। रेलवे का दिया घर। खुशहाल ज़िंदगी। क्या नहीं है उसके पास। लेकिन उसे तो ज़िंदगी से पंगा लेना है। बेटे के अरमान पूरे करने के लिए कबड्डी में वापस आई जया निगम को अब कबड्डी में अपनी भी खुशी दिखाई देने लगती है। लेकिन यह पंगा इतना आसान थोड़े ही है।

Friday, 24 January 2020

रिव्यू-मकसद में कामयाब ‘स्ट्रीट डांसर 3डी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि अगर डिज़्नी पिक्चर्स वाले भारत से अपना बिस्तरा उठा कर नहीं भागते तो इस फिल्म का नाम एबीसीडी 3’ होना था। एबीसीडीसीरिज़ की पिछली दो फिल्मों जैसी ही कहानी, वही कलाकार, वही मुकाबले, वही डांस... तो फिर नया क्या है? नया है लंदन शहर, नया है कहानी में आने वाला एक ट्विस्ट। क्या...? आइए, जानते हैं।

Saturday, 18 January 2020

रिव्यू-थमी-थमी फिल्म है ‘जय मम्मी दी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
स्कूल-कॉलेज के ज़माने की दो सहेलियां किसी बात पर ऐसी बिगड़ीं कि दुश्मन बन गईं। लेकिन शादी के बाद भी रहती एक-दूसरे के पड़ोस में हैं। यहां से शिफ्ट होकर दोनों नए घर में गईं तो वो घर भी चिपके हुए निकले। वाह रे राईटर साहब, आपकी समझदानी को म्यूजियम में रखूं। खैर...! किस बात पर ये दोनों ऐसी पक्की दुश्मन बनी थीं, यह पूरी फिल्म में सामने नहीं आता। और जब अंत में सामने आता है तो दिल ढूंढता है चुल्लू भर पानी, कि मुंह धो कर नींद भगा लें। दिक्कत यह है कि इन दोनों के बेटे-बेटी को एक-दूजे से प्यार हो जाता है। क्यों और कैसे? यह राईटर साहब नहीं बताना चाहते, उनकी मर्ज़ी। अब इन दोनों ने आपस में करनी है शादी लेकिन अपनी-अपनी मम्मियों के आगे इनकी ही नहीं इनके बापों की भी नहीं चलती। इनकी मम्मियों की तो... जय।

Monday, 13 January 2020

आ गए ऑस्कर के फाइनल नोमिनेशन


-दीपक दुआ...
ऑस्कर अवार्ड्स के फाइनल नॉमिनेशन आ गए हैं। 13 जनवरी को ऑस्कर अकादमी ने मुझे भेजे मेल में ये नोमिनेशन बताए हैं-Nominations for the 92nd Academy Awards-

Saturday, 28 December 2019

2019-हीरोइन-बिना नायिकाओं का साल

-दीपक दुआ...
आप चाहें तो यकीन करें लेकिन सच यही है कि 2019 में सबसे ज्यादा कामयाबी पाने वाली ज्यादातर फिल्मों में नायिकाओं के किरदार बिल्कुल ही कमजोर थे। हालांकि एक तरफ कुछ फिल्मकार अभिनेत्रियों को दमदार रोल देने की कोशिश में लगे रहे लेकिन दूसरी तरफ बाजार के समीकरणों के चलते ज्यादातर बड़ी फिल्मों में अदाकाराओं को बस चलताऊ किस्म की भूमिकाओं से ही संतोष करना पड़ा। नायक-प्रधान सिनेमा की बहुतायत के इस दौर में नायिकाओं को सशक्त किरदार मिलेंगे भी तो भला कैसे?