Saturday, 18 January 2020

रिव्यू-थमी-थमी फिल्म है ‘जय मम्मी दी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
स्कूल-कॉलेज के ज़माने की दो सहेलियां किसी बात पर ऐसी बिगड़ीं कि दुश्मन बन गईं। लेकिन शादी के बाद भी रहती एक-दूसरे के पड़ोस में हैं। यहां से शिफ्ट होकर दोनों नए घर में गईं तो वो घर भी चिपके हुए निकले। वाह रे राईटर साहब, आपकी समझदानी को म्यूजियम में रखूं। खैर...! किस बात पर ये दोनों ऐसी पक्की दुश्मन बनी थीं, यह पूरी फिल्म में सामने नहीं आता। और जब अंत में सामने आता है तो दिल ढूंढता है चुल्लू भर पानी, कि मुंह धो कर नींद भगा लें। दिक्कत यह है कि इन दोनों के बेटे-बेटी को एक-दूजे से प्यार हो जाता है। क्यों और कैसे? यह राईटर साहब नहीं बताना चाहते, उनकी मर्ज़ी। अब इन दोनों ने आपस में करनी है शादी लेकिन अपनी-अपनी मम्मियों के आगे इनकी ही नहीं इनके बापों की भी नहीं चलती। इनकी मम्मियों की तो... जय।

Monday, 13 January 2020

आ गए ऑस्कर के फाइनल नोमिनेशन


-दीपक दुआ...
ऑस्कर अवार्ड्स के फाइनल नॉमिनेशन आ गए हैं। 13 जनवरी को ऑस्कर अकादमी ने मुझे भेजे मेल में ये नोमिनेशन बताए हैं-Nominations for the 92nd Academy Awards-

Saturday, 28 December 2019

2019-हीरोइन-बिना नायिकाओं का साल

-दीपक दुआ...
आप चाहें तो यकीन करें लेकिन सच यही है कि 2019 में सबसे ज्यादा कामयाबी पाने वाली ज्यादातर फिल्मों में नायिकाओं के किरदार बिल्कुल ही कमजोर थे। हालांकि एक तरफ कुछ फिल्मकार अभिनेत्रियों को दमदार रोल देने की कोशिश में लगे रहे लेकिन दूसरी तरफ बाजार के समीकरणों के चलते ज्यादातर बड़ी फिल्मों में अदाकाराओं को बस चलताऊ किस्म की भूमिकाओं से ही संतोष करना पड़ा। नायक-प्रधान सिनेमा की बहुतायत के इस दौर में नायिकाओं को सशक्त किरदार मिलेंगे भी तो भला कैसे?

2019-हीरोज़-आगे निकले दूसरी कतार के हीरो

 -दीपक दुआ...
2019 में भले ही बड़े नाम वाले नायकों के दम पर टिकट-खिड़की गुलजार होती रही लेकिन इस साल सुखद बात यह रही कि दूसरी कतार में खड़े नायकों ने अचानक से बढ़त बनाते हुए अपनी प्रतिभा से सबको चौंकाया। इन्होंने यह भी बताया कि अगर इन्हें यूं ही सलीकेदार कहानियों में कायदे के रोल मिलते रहे तो फिर आने वाला कल इनका ही होगा।

2019 की फिल्में-कुछ शानदार बाकी मसालेदार

-दीपक दुआ...
हिन्दी फिल्में बनाने वाले भले ही कितनी ऊंची बातें करें लेकिन सच यह है कि हिन्दी सिनेमा टिकट-खिड़की का इस कदर मोहताज हो चुका है कि ज्यादातर फिल्मकार कुछ हट कर दिखाने का बहुत बड़ा साहस नहीं कर पाते। फिल्मकारों पर बाजार का दबाव इस कदर हावी रहता है कि अच्छे कंटैंट वाली फिल्में या तो उभर कर नहीं पातीं या फिर उनमें भी ऐसी चीजें जबरन डालनी पड़ती हैं जो आम दर्शकों को पसंद आएं। फिल्म वालों ने अगर हमें मसाले और चटपटेपन की लत लगाई है तो काफी बड़ा कसूर हम दर्शकों का भी है जो इन मसालों और चटपटेपन से हट कर कुछ देखना ही नहीं चाहते। यही कारण है कि इस साल सबसे ज्यादा कामयाबी पाने वाली ज्यादातर फिल्मों में यही मसाले, यही चटपटापन दिखाई देता है। हम अगर ऐसी ही फिल्में सराहेंगे तो यकीनन फिल्मकार भी हमें ऐसी ही फिल्में देंगे। आइए एक नजर 2019 की फिल्मों पर डालें।