Saturday, 16 March 2019

रिव्यू-अरमान जगाती ‘फोटोग्राफ’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
मैडम, बरसों बाद जब आप यह फोटो देखेंगी तो आपको अपने चेहरे पर यही धूप दिखाई देगी...मैडम तो फोटो खिंचवा कर चली गई। गांव में बैठी अपनी दादी को बहलाने के लिए फोटोग्राफर ने इसी मैडम की तस्वीर दादी को भेज दी कि मैंने अपने लिए यह लड़की पसंद कर रखी है। उसी वक्त पीछे नूरीफिल्म का गाना बज रहा था, सो लड़की का नाम भी बता दिया-नूरी। लेकिन दादी गांव से उठ कर सीधे मुंबई धमकी-मिलवाओ नूरी से। फोटोग्राफर के कहने पर मैडम मान गई, दादी से मिलती रही और कहानी आगे चलती रही।

Wednesday, 13 March 2019

रिव्यू-भटकी हुई फिल्म ‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
मुंबई की एक झोंपड़पट्टी में रहने वाले हज़ारों लोगों की बस्ती में हल्केहोने के लिए कोई टॉयलेट नहीं है। औरतें रोज़ मुंह अंधेरे डब्बे उठा कर एक साथ जाती हैं। एक दिन सरगम अकेली जाती है और कोई उसका रेप कर देता है। सरगम का बेटा और कोई रास्ता देख दिल्ली जाकर प्रधानमंत्री को अपनी चिट्ठी देता है। कुछ दिन बाद उसकी बस्ती में टॉयलेट बन जाता है।

भई वाह, कितनी सीधी, सरल, सुंदर, कहानी है। लेकिन इसी कहानी को आप पर्दे पर देखिए तो लगता है कि डायरेक्टर ने सीधे-सीधे बात कहने की बजाय जलेबियां क्यों बना दीं? ओह सॉरी, ‘शिटवाली फिल्म में मिठाइयों की बात नहीं।

रिव्यू-उम्मीदों की किश्ती पर सवार ‘हामिद’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
अगर बच्चों के उसूलों पर चले, तो दुनिया कब की जन्नत हो गई होती...

इस फिल्म का यह संवाद फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रह जाता है। दिल के किसी कोने में यह अहसास भी जगता है कि क्यों नहीं यह दुनिया बच्चों के हिसाब से चलती? क्यों नहीं सब मासूम हो जाते? क्यों नहीं हम बीते ज़ख्मों को भुला कर आगे बढ़ जाते?

Sunday, 10 March 2019

ओल्ड रिव्यू-उलझे ताने-बाने सुलझाती ‘कहानी’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
एक कहानी में कितनी सच्चाई और कितनी कल्पना होती है? क्या एक कहानी पूरी तरह से सच हो सकती है? या फिर क्या एक सच असल में कहानी हो सकता है? जितने उलझे हुए ये सवाल हैं लगभग उतने ही उलझे हुए ताने-बाने हैं इस फिल्म की कहानी के। लेकिन जब ये खुलते हैं तो सब सुलझ जाता है। आप इसे देख कर खाली हाथ नहीं लौटते हैं और यही एक कहानी की सफलता है कि जब आप कुछ पढ़ें या देखें तो आपको कुछ हासिल हो।

Saturday, 9 March 2019

रिव्यू-सिक्के का तीसरा पहलू दिखाती ‘बदला’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
एक औरत और उसका प्रेमी मज़े करके लौट रहे हैं। रास्ते में एक हादसा होता है। पुलिस बुलाई तो दोनों के घरों में पता चला जाएगा। सो, उसे दुनिया से छुपाने के लिए यह एक झूठ गढ़ते हैं, फिर दूसरा, तीसरा... तभी प्रेमी का खून हो जाता है और यह औरत उसे मारने के इल्ज़ाम में पकड़ी जाती है। लेकिन इसका कहना है कि वह बेकसूर है। एक नामी वकील को वह सारी कहानी सुनाती है। परत-दर-परत सच सामने आने लगता है। क्या है सच? क्या उस हादसे और इस खून में कोई नाता है? और यहां कौन, किससे बदला ले रहा है? किस बात का बदला?