Sunday, 18 August 2019

रिव्यू-शाबाशियों की हकदार ‘मिशन मंगल’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
भारत ने तय किया कि वह मंगल ग्रह पर अपना यान भेजेगा। अमेरिका, रूस जैसे देश तक पहली कोशिश में  नाकाम हो चुके थे। लेकिन भारतीय वैज्ञानिक जुट गए। दिन-रात एक कर दिया और एक दिन उन्होंने पहली ही कोशिश में मंगल पर अपना यान भेज भी दिया-दूसरे देशों के मुकाबले कहीं कम लागत में, कहीं कम समय में, कहीं ज़्यादा परफैक्शन के साथ।

यह कहानी नहीं, हकीकत है। और अगर इस हकीकत को पूरे हकीकती अंदाज़में दिखाया जाए तो सबसे पहले तमाम दर्शकों को एयरोस्पेस इंजीनियरिंग करवानी पड़ेगी और उसके बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में ले जाकर कम--कम साल भर की इंटर्नशिप। उसके बाद बड़े भारी-भरकम रिसर्च और तगड़ी वैज्ञानिक शब्दावली वाली फिल्म बन कर आएगी जिसे देख कर ये पढ़े-लिखेदर्शक कोई मीनमेख नहीं निकालेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है। दूसरा तरीका यह है कि इस फिल्म की तमाम बातों को बड़े ही सहज, सरल शब्दों में, हिन्दी सिनेमा की तमाम खूबियों (इन्हें आप मसालाभी कह सकते हैं) के साथ इस तरह से दिखाया जाए कि इसे बच्चे भी आसानी से समझ सकें। इस फिल्म को बनाने वालों ने यही दूसरे वाला तरीका चुना है।

Saturday, 17 August 2019

रिव्यू-सच के कई चेहरे हैं ‘बाटला हाउस’ में

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
19 सितंबर, 2008 को दिल्ली की बाटला हाउस’ (या बटला हाउस) की उस इमारत में असल में क्या हुआ था, इसे लेकर तब तरह-तरह की बातें सुनने में आई थीं। आज भले ही इस केस से जुड़ा काफी सारा सच सामने चुका हो फिर भी कुछ लोगों का मानना है कि उस दिन वहां वैसा नहीं हुआ जैसा पुलिस बताती है। वहां कोई आतंकी नहीं थे और पुलिस ने सिर्फ अपनी इज़्ज़त ढांपने के लिए वो फर्ज़ी एनकाउंटर किया था जिसमें कुछ बेकसूर छात्रों के साथ-साथ अपने ही एक इंस्पेक्टर को भी पुलिस वालों ने मार डाला था। यह फिल्म इसी केस से जुड़े पहलुओं, लोगों, उनकी मनोदशाओं और सामने आते सच-झूठ की पड़ताल करती है-कहीं यथार्थवादी तो कहीं फिल्मी तरीके से।

Friday, 9 August 2019

रिव्यू-‘जबरिया जोड़ी’ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
बिहार के कुछ इलाकों में पकड़ुआ विवाहका चलन है। अपनी बेटी के लिए दहेज या किसी अन्य  कारण से उपयुक्त वर न खोज पाने के चलते किसी लड़के को जबरन उठवा कर उससे अपनी बेटी को ब्याह देने के इस काम में दबंगों, गुंडों की मदद ली जाती है। यह फिल्म भी इसी पर बेस्ड है। हीरो अपने दबंग बाप के कहने पर अपने गुंडे दोस्तों की मदद से जबरिया शादी करवाने की समाज सेवाकरता फिरता है। बचपन में बिछड़ी हीरोइन उसे मिली तो दोनों के भीतर प्यार जगा। पर कभी परिवार आड़े आ गए तो कभी दोनों के अहं। लेकिन प्यार तो प्यार होता है, कभी तो फूटेगा ही।

Friday, 2 August 2019

रिव्यू-बेअसर पुड़िया देता ‘ख़ानदानी शफ़ाखाना’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
पंजाब के होशियार पुर में खानदानी शफाखाना यानी सैक्स क्लिनिकचलाने वाले हकीम ताराचंद (कुलभूषण खरबंदा) अपनी वसीयत में अपना यह दवाखाना अपनी भानजी बेबी बेदी (सोनाक्षी सिन्हा) के नाम कर गए-इस शर्त के साथ कि कम से कम छह महीने उसे यह क्लिनिक चलाना पड़ेगा, उसके बाद ही वह उसे बेच पाएगी। बेमन से बेबी ने यह काम शुरू किया। धीरे-धीरे उसका मन इसमें रमने लगा। लेकिन घर-परिवार, दुनिया वाले उसके खिलाफ हो गए। हाय रब्बा, लड़की होकर ऐसे वालाक्लिनिक चलाती है, सरेआम सैक्सकी बात करती है...! लेकिन बेबी ठहरी होशियार पुर की होशियार लड़की। उसने हार थोड़े ही माननी है...!

Sunday, 28 July 2019

हाशिये पर बैठे लोगों की आवाज़ है ‘चम्म’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
क्या आप पंजाबी फिल्में देखते हैं? क्या आप फिल्मों में पंजाब की तस्वीरें देखते हैं? क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज़्यादा दलित जनसंख्या किस प्रदेश में है? आप कहेंगे कि ये कैसे बेमेल सवाल हैं? लेकिन ऐसा नहीं है। यदि आप पंजाबी फिल्में देखते हैं या हिन्दी फिल्मों में पंजाबी माहौल, पंजाबी किरदार देखते हैं तो आप जानते होंगे कि यह एक खुशहाल प्रदेश है, यहां के लोग हर समय तंदूरी मुर्गे, मक्के की रोटी, सरसों का साग, लस्सी और शराब का सेवन करते हैं। इन लोगों के पास लंबे-चौड़े खेत होते हैं और हर घर से कोई कोई कनैडा में बैठ कर इनके लिए डॉलर-पाउंड भेज रहा है। इनके पास पहनने को ढेरों रंग-बिरंगे कपड़े होते हैं और ये लोग ज़रा-ज़रा सी बात पर भंगड़ा करने लगते हैं, हनी सिंह और बादशाह के गानों पर डांस करने लगते हैं। यानी कुल मिला कर पंजाब वालों की ज़िंदगी में सब कुछ बस उजला ही उजला है, किसी को कोई गम नहीं, कोई फिक्र नहीं। पर काश, कि यह सब सच होता। क्योंकि एक सच यह भी है कि भारत की दलित आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा, करीब 32 प्रतिशत पंजाब में ही बसता है और इनके सामने भी गरीबी, बेरोज़गारी, नशाखोरी, भेदभाव जैसी वही तमाम समस्याएं हैं जो बाकी देश में भी पाई जाती हैं। पर क्या आपने कभी किसी फिल्म में यह सब देखा? पंजाबी फिल्म चम्मआपको यही सब दिखाती है।