Friday, 21 September 2018

रिव्यू-इस ‘मंटो’ को समझने के लिए उस मंटो को समझना होगा

-दीपक दुआ...
अगर आप मेरे अफसानों को बर्दाश्त नहीं कर सकते... तो इसका मतलब यह है कि ज़माना ही नाकाबिले बर्दाश्त है...

इतनी बेबाकी, ठसक और शिद्दत के साथ सआदत हसन मंटो नाम के जिस शख्स ने उम्र भर अपनी बात कही, वह उम्र भर किस संघर्ष से होकर गुजरता रहा और अपने आखिरी दौर में वह किस कदर मजबूर था, यह भला कौन जानता है? और अगर इन संघर्षों और मजबूरियों से उसका साबका हुआ होता तो क्या यह मुमकिन नहीं कि वह सिर्फ 42 की उम्र में दुनिया छोड़ता...?

Thursday, 20 September 2018

रिव्यू-रूखी-सूखी ‘पाखी’

-दीपक दुआ...
एक कोठा। उसका एक खूंखार मालिक। कुछ लड़कियां। कोई हंस कर तो कोई रो कर अपने कामको करती लड़कियां। वहां लड़कियां बेच कर जाते हैं लोग। कोई अपनी प्रेमिका, कोई भतीजी तो किसी और को बेच जाता है वहां। लेकिन जब वहां एक बच्ची लाई जाती है तो उसे वहां से निकालने के लिए जुट जाते हैं सब लोग।

फिल्म की कहानी बुरी नहीं। लेकिन दिक्कत है इस कहानी को फैलाने के लिए लिखी गई स्क्रिप्ट के साथ। इस कदर पैदल, धीमी और दोहराव लिए हुए है यह, कि शुरू के दस मिनट के बाद इसे झेलना भारी हो जाता है। 

Saturday, 15 September 2018

रिव्यू-सरस छे पर हल्की छे ‘मित्रों’

-दीपक दुआ...
अहमदाबाद में एक निठल्ला लड़का। है तो इंजीनियर लेकिन शेफ बनना चाहता है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो एक अमीर आदमी का घरजंवाई बन जाए ताकि उनकी मुसीबत टले। इसी शहर की एक होशियार लड़की। बिजनेस करना चाहती है, पढ़ने के लिए बाहर जाना चाहती है। पर उसके पप्पा चाहते हैं कि वो शादी करे और यहां से टले। उधर वो अमीर आदमी चाहता है कि उसका होने वाला (निठल्ला) दामाद पहले खुद को होशियार साबित करे। सो, यह निठल्ला लड़का और वो होशियार लड़की मिल कर एक बिज़नेस शुरू करते हैं जो चल निकलता है। अब लड़का-लड़की साथ होंगे तो ज़ाहिर है, प्यार-व्यार तो होगा ही। अंत में सारे पप्पा लोग भी मान ही जाते हैं।

Friday, 14 September 2018

रिव्यू-‘प्यार’ और ‘फ्यार’ के बीच झूलती ‘मनमर्ज़ियां’

-दीपक दुआ...
छोटे शहर की बोल्ड-बिंदास लड़की। अपने बॉय-फ्रैंड के साथ मौज-मज़े करती लड़की। दुनिया भर से पंगा लेती, भिड़ती लड़की। विदेश से शादी करने आया एक सीधा लड़का। आते ही उसे भा गई यह लड़की। उसकी हकीकत जान कर भी उससे शादी करने को तुला लड़का। (तनु वैड्स मनुयाद रही है...?) मर्ज़ी होते हुए भी लड़की ने कर ली इस सीधे लड़के से शादी। लड़की अब भी बगावती तेवर अपनाए हुए है और लड़का उसका दिल जीतने में लगा है। यहां तक कि लड़की की खुशी के लिए वह उसे छोड़ने को भी तैयार हो जाता है। (हम दिल दे चुके सनमयाद रही है...?) इस कहानी को बनाया है अनुराग कश्यप ने जो इससे पहले भी देव डीमें एक प्रेम-त्रिकोण दिखा चुके हैं। तो जनाब, कुल मिला कर मामला यह कि कहानी है हम दिल दे चुके सनमवाली, सैटअप है तनु वैड्स मनुवाला और ट्रीटमैंट है देव डीवाला। कुछ इस तरह से की हैं अनुराग ने मनमर्ज़ियां। अब की हैं, तो की हैं।