Monday, 15 October 2018

रिव्यू-सिनेमाई खज़ाने की चाबी है ‘तुम्बाड’

-दीपक दुआ...
दुनिया में हर एक की ज़रूरत पूरी करने का सामान है, लेकिन किसी का लालच पूरा करने का नहीं।महात्मा गांधी के इस कथन से शुरू होने वाली यह फिल्म अपने पहले ही सीन से आपको एक ऐसी अनोखी दुनिया में ले चलती है जो इससे पहले किसी हिन्दी फिल्म में तो क्या, शायद किसी भारतीय फिल्म में भी कभी नहीं दिखी होगी। महाराष्ट्र का एक वीरान गांव-तुम्बाड, जहां हर वक्त बारिश होती रहती है क्योंकि देवता क्रोधित हैं। इसलिए कि पूरी धरती को अपनी कोख से जन्म देने वाली देवी ने अपनी सबसे पहली संतान हस्तर को उनके हाथों मरने से बचा लिया था। वही लालची हस्तर, जो देवी के एक हाथ से बरसते सोने को तो ले गया लेकिन देवताओं ने उसे दूसरे हाथ से बरसते अनाज को नहीं ले जाने दिया। उसी हस्तर के मंदिर के पुजारियों के परिवार में भी दो तरह की संतानें हुईं-लालची और संतुष्ट। 1913 के साल में ये लोग यहां से चले तो गए लेकिन लालची विनायक लौटता रहा और हस्तर के खज़ाने से अपनी जेबें भर-भर ले जाता रहा। उसने अपने बेटे को भी सिखाया कि यह खज़ाना कैसे हाथ लगता है। लेकिन विनायक अपनी दादी की कही यह बात भूल गया कि-विरासत में मिली हुई हर चीज़ पर दावा नहीं करना चाहिए।

Saturday, 6 October 2018

रिव्यू-रहस्य और रोमांच में लिपटी संगीतमय ‘अंधाधुन’

-दीपक दुआ...
फ्रैंच शॉर्ट-फिल्म पियानो ट्यूनरमें एक अंधा पियानो वादक बताता है कि शाहजहां ने ताजमहल का नक्शा बनाने वाले वास्तुकार की पत्नी को मरवा दिया था कि ताकि वह अपनी पत्नी की जुदाई के दर्द को महसूस कर सके और शाहजहां की पत्नी का एक भव्य मकबरा बना सके।

कलाकार ऐसे ही होते हैं-जुनूनी, अपनी धुन के पक्के, अपनी कला के लिए अंधे और तभी वे ऊंचाइयां छू पाते हैं। इस फिल्म का नायक आकाश भी ऐसा ही एक अंधाऔर अपनी धुनका पक्का पियानो प्लेयर है (वरना हिन्दी में अंधाधुनकोई शब्द नहीं होता) उसकी ज़िंदगी सही जा रही है। पियानो बजाता है, सिखाता है, संयोग से एक गर्लफ्रैंड भी मिल जाती है। लेकिन एक दिन वह एक खून होते हुए देखलेता है। अब अंधा आदमी देखकैसे सकता है? और यहीं से शुरू होती है छल, कपट और धोखे की एक अंधी दौड़ जिसमें कोई भी पाक-साफ नहीं है। हर किसी के अपने छुपे हुए इरादे हैं, स्वार्थ हैं। दूसरों को मात देकर खुद की जीत पक्की करने के इस शतरंजी खेल में ढेरों ट्विस्ट एंड टर्न्स हैं और यही घुमावदार मोड़ फिल्म के दौरान सिर्फ आपको लगातार बांधे रखते हैं बल्कि एक पल के लिए भी आपको अपनी नज़रें इधर-उधर नहीं करने देते।

Tuesday, 2 October 2018

मिलिए ‘सुई धागा’ की अम्मा यामिनी दास से

-दीपक दुआ...
हाल ही में रिलीज़ हुई फिल्म सुई धागाके तमाम कलाकारों की तारीफें हो रही हैं। उन कलाकारों की भी जिनके नाम तक से लोग अनजान हैं। इस फिल्म में मौजी यानी वरुण धवन की अम्मा बनीं अदाकारा को देख कर लगता है कि यू.पी. के किसी कस्बे के किसी आम परिवार की अम्मा ऐसी ही तो होती हैं। इस फिल्म का रिव्यू करते समय इस अदाकारा के बारे में पड़ताल की तो पता चला कि उनका नाम यामिनी दास है और... और बस। लेकिन रिव्यू पोस्ट किया तो यामिनी दास से जुड़ना हो गया। उनसे जुड़े तो ढेरों बातें हुईं। पहले तो उन्होंने मेरे रिव्यू (रिव्यू-‘सुई धागा’ में सब बढ़िया है) की तारीफ की और जब उन्हें पता चला कि मैं फिल्मी कलियांजैसी फिल्म-पत्रिका से बरसों तक जुड़ा रहा हूं तो वह बहुत खुश हुई।


उसके बाद मुझे यामिनी के बारे में जो पता चला उसे जान कर मुझे तो हैरानी हुई ही, आपको भी होगी कि यामिनी मशहूर ग़ज़ल-गायक चंदन दास की पत्नी हैं, कि वो अभिनेता नमित दास (जो सुई धागामें गुड्डू बने हैं) की मां हैं और सबसे बड़ी बात यह कि सुई धागायामिनी की पहली फिल्म है।