-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
एक छोटे-से शहर के स्कूल की छठी क्लास में नया आया दीपू अपनी धमक बनाने के लिए गप्प उड़ा देता है कि उसके दादा सुपर हीरो हैं और एलियन्स के साथ उनका मिलना-भिड़ना चलता रहता है। अधिकांश बच्चे उसकी बात मान लेते हैं तो कुछ बच्चे सत्य की खोज में सवाल भी उठाते हैं कि सुपर हीरो हैं तो पॉवर दिखाएं। दीपू सभी को यह कह कर बरगलाता है कि जब एलियन्स आएंगे तो दादा में पॉवर आएगी। और एक दिन ‘एलियन्स’ सचमुच आ जाते हैं और फिर…!
अभी तक चार गुजराती फीचर फिल्में और एक हिन्दी शॉर्ट फिल्म बना कर तीन राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके फिल्मकार मनीष सैनी की इस पहली हिन्दी फीचर फिल्म ‘द ग्रेट ग्रैंड सुपर हीरो-एलियन्स का आगमन’ (The Great Grand Superhero: Aliens Ka Aagman) की कहानी का पूरा प्लॉट ही दिलचस्प है। एक संवाद देखिए-‘जब रात को एलियन बच्चे सोते नहीं हैं न, तो उनकी मां उनसे कहती है कि बेटा सो जा, नहीं तो ग्रेट ग्रैंड सुपर हीरो आ जाएगा।’
अपने बचपन में यार-दोस्तों के बीच गप्पें हर किसी ने उड़ाई हैं। ऐसी बातें, जो सच नहीं हैं लेकिन उन्हें सच्चाई के रैपर में लपेट कर हम सब ने मज़े लिए हैं। इस फिल्म में दीपू यही कर रहा है। उसे नई जगह पर नए दोस्त बनाने हैं, उन पर रौब जमाना है। लेकिन यहां ट्विस्ट तब आता है जब ‘एलियन्स’ सचमुच आ जाते हैं और दीपू की कही बातें सच होने लगती हैं। मनोरंजन के साथ-साथ यह कहानी हमें धरती को साफ-सुथरा, हरा-भरा रखने का संदेश भी देती है। धरती बचेगी तो हम बचेंगे वरना किसी दिन हमारे द्वारा फैलाए जा रहे कचरे और प्रदूषण को खत्म करने सचमुच एलियन्स आ गए तो…?
मनीष सैनी को बच्चों की फिल्में बनाना, उनका मनोविज्ञान समझना और उनसे काम निकलवाना आता है। राष्ट्रीय पुरस्कार पाने वाली उनकी दोनों गुजराती फिल्में ‘ढ’ और ‘गांधी एंड कंपनी’ ऐसे ही मिज़ाज की फिल्में थीं। यह फिल्म भी हमें बच्चों के उसी संसार में ले जाती है जिसमें छल और कपट नहीं है बल्कि दोस्ती है, भरोसा है, संस्कार हैं और कुछ कर दिखाने का जज़्बा भी है। अपने कलेवर से बाल-फिल्म लगती यह फिल्म (The Great Grand Superhero: Aliens Ka Aagman) अपने फ्लेवर से हमें यह संदेश दे पाने में कामयाब रहती है कि हम लोग खुद ही अपने एकमात्र घर यानी इस पृथवी को नुकसान पहुंचाने पर उतारू हैं। हालांकि यह संदेश थोड़ा हल्केपन से आता है। प्रदूषण, कचरे, पौधारोपण से जुड़ी बातें थोड़ा और पैनेपन से होनी चाहिए थीं। व्हील चेयर पर बैठी बच्ची को भी प्रदूषण आदि से जुड़ी किसी बीमारी का शिकार बताया जाता तो फिल्म का मैसेज खुल कर व खिल कर सामने आता। कहीं-कहीं फिल्म का सुस्ताना और एकरस हो जाना भी खलता है लेकिन फिर लगता है कि इस किस्म की फिल्म में भगदड़ की बजाय ऐसा ही सुकून होना चाहिए।
(रिव्यू-हंसाती है, सिखाती है ‘ढ’)
बतौर निर्देशक मनीष अपने काम में सधे रहते हैं। सीन बनाने, चुटीलेपन के साथ अपनी बात कहने और कलाकारों से उम्दा काम करवा पाने की उनकी क्षमता इस फिल्म (The Great Grand Superhero: Aliens Ka Aagman) में साफ दिखाई देती है। फिल्म के सभी बाल-कलाकारों ने काम भी सचमुच ज़ोरदार किया है। मिहिर गोडबोले ने दीपू के रोल में अपनी मासूमियत से जान फूंकी है तो लड्डू बने शिवांश चोरघे ने हंसाने का काम किया है। जिहान होदर,, रुद्रांश चोंडेकर, अस्मि देव, अद्विका राय जैसे इन कलाकारों के अतिरिक्त शरत सक्सेना, विनोद सूर्यवंशी, दुर्गेश कुमार, भावेश श्रीमाली, कृष्णा भट्ट, रिद्धि शुक्ला, नीलेश पंड्या आदि ने भी भरपूर साथ दिया। जैकी श्रॉफ जमे भी और जंचे भी। ज़रा देर को आईं भाग्यश्री प्यारी लगीं। एलियन बने सहर्ष शुक्ला और कुमार सौरभ असरदार रहे। प्रतीक बब्बर ने अपना नाम बदल कर भले ही प्रतीक स्मिता पाटिल कर लिया हो, मगर काम उनका पहले की तरह ही सपाट और भावशून्य रहा है।
किसी छोटे-से कस्बे की लोकेशन इस फिल्म को एक प्यारा, हरियाला और सुकून भरा लुक देती है। कैमरे, रंगों, एनिमेशन व बैकग्राउंड म्यूज़िक से फिल्म निखार पाती है। आरुषी कौशल, डॉ. कुमार विश्वास आदि के लिखे गीत फिल्म के स्वाद के मुताबिक हैं।
धरती को हरा-भरा व कचरा मुक्त रखने, हमारे पापा ही हमारे असली सुपर हीरो होते हैं का संदेश देने वाली और अंत में अपने सीक्वेल की संभावना छोड़ती इस फिल्म को कहीं-कहीं हल्की पड़ने के बावजूद देखा जा सकता है। बच्चों के लिए स्वस्थ मनोरंजन कहीं से भी मिले तो उसे ले लेना चाहिए।
(रेटिंग की ज़रूरत ही क्या है? रिव्यू पढ़िए और फैसला कीजिए कि यह कितनी अच्छी या खराब है। और हां, इस पोस्ट के नीचे कमेंट कर के इस रिव्यू पर अपने विचार ज़रूर बताएं।)
Release Date-29 May, 2026 in theaters
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)
