-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
यह सवाल लंबे समय से पूछा जा रहा था कि आखिर इस फिल्म ‘रामायण’ (Ramayana) में ऐसा क्या होगा कि इस पर चार हज़ार करोड़ जैसी भारी राशि खर्च कर दी गई? यह फिल्म देखिए तो इस सवाल का जवाब बार-बार मिलता है जब पर्दे से बह रही भव्यता और दिव्यता बार-बार आपको अपने पाश में बांधती है, कस कर।
इस फिल्म की कहानी क्या है? वही पुरानी-जंबूद्वीपे, भरतखंडे, आर्यावर्ते, भारतवर्षे, एक नगरी है विख्यात अयोध्या नाम की। उसी नगरी के राजा दशरथ के घर भगवान विष्णु ने एक मनुष्य के रूप में अपना सातवां अवतार लिया था, जिसका नाम था-राम। यह फिल्म उसी सदियों पुरानी कथा को फिर से दिखाने, सुनाने, बताने का काम करती है, पूरी भव्यता के साथ, बहुत सारी दिव्यता के साथ।
बहुत ही सरल और सहज ढंग से यह फिल्म (Ramayana Part 1) अपनी शुरुआत में ही कहानी के धागे सुलझा देती है। एक ओर देवों से हारने के बाद रसातल में गुलामों की तरह रह रहे असुरों में से एक ऋषि पुत्र असुर दशानन घोर तपस्या करने के बाद ब्रह्मा से अमरत्व पाकर रावण बना जिसने कुबेर की नगरी लंका पर आधिपत्य स्थापित किया। दूसरी ओर उस रावण से पृथ्वी को मुक्ति दिलाने के लिए मनुष्य रूप में जन्मे राम की शिक्षा-दीक्षा, सीता से विवाह, पिता के वचन की लाज रखने के लिए वन गमन और वहां सूर्पनखा की कटी नाक का बदला लेने आए रावण द्वारा सीता के हरण की कहानी है। इस फिल्म के पहले भाग का अंत रावण और राम की इन प्रतिज्ञाओं पर होता है कि वे एक-दूसरे को तीनों लोकों के सामने मारेंगे। स्पष्ट है कि अब अगले भाग में सीता की खोज और राम-रावण युद्ध के बाद राम की अयोध्या वापसी का चित्रण होगा।
‘रामायण’ की जिस कहानी को हम-आप सदियों से सुनते-कहते आए हैं, उन्हें इस फिल्म में जैसा रूप दिया गया है, उसे देखना दर्शक-मन को सुहाता है। इन घटनाओं को जिस भव्यता से फिल्माया गया है, उसके लिए ‘भव्य’ शब्द छोटा लगता है। ऐसे चमत्कृत करते दृश्य, जिन्हें आप सोच भी नहीं सकते। इन दृश्यों के फिल्मांकन के लिए चाहे सैट्स का निर्माण किया गया हो या वी.एफ.एक्स. की मदद ली गई हो, इन्हें देखना एक ऐसा दिव्य अनुभव हो जाता है जिसके लिए ‘दिव्य’ शब्द बौना लगता है। और सबसे सुखद यह कि यह भव्यता, यह दिव्यता कहीं भी बनावटी या गैरज़रूरी न लग कर पूरी तरह से विश्वसनीय लगती है। यह विश्वसनीयता ही इस फिल्म (Ramayana Part 1) के निर्माण को सफल बनाती है।
श्रीधर राघवन, नितेश तिवारी और श्रेयस जैन ने फिल्म की लिखाई बहुत ही सरल रखी है। ज़ाहिर है कि जन-जन तक पहुंच रही किसी रचना के लिए यह ज़रूरी भी है। हालांकि इससे कहीं-कहीं कुछ ज़्यादा ही हल्कापन भी आया है। कुछ संवाद, विशेषकर जो लक्ष्मण ने बोले, बहुत ही कमतर लगे। और हां, ‘वापस लौटना’ जैसी गलत हिन्दी भी दो-तीन बार दिखी है। लेखन पक्ष को थोड़ा और भारी, थोड़ा और दमदार किया जा सकता था। कई संवाद बहुत असरदार हैं और कई जगह बिना संवादों के भी सटीक सीन बनाए गए हैं। बीच-बीच में हास्य के हल्के-फुल्के पल भी रखे गए हैं। कई दृश्य आपकी भावनाओं को छूते हैं, मन द्रवित करते हैं, आंखें नम करते हैं। यह इसे लिखने वालों की सफलता है।
नितेश तिवारी का निर्देशन सधा हुआ है। इस फिल्म (Ramayana Part 1) को देख कर लगता है कि ‘दंगल’ जैसी फिल्में तो वह अपना हाथ साफ करने के लिए बना रहे थे। फिल्म के गीत धीरे-धीरे अपना असर छोड़ते हैं। इन्हें आराम से सुना और देखा जाना चाहिए। शिव तांडव स्तोत्र पर रावण बने यश का नृत्य अद्भुत है। इसे बार-बार देखा जा सकता है। कैमरा, ग्राफिक्स, रंग, कॉस्ट्यूम जैसे सभी तकनीकी पक्ष बेहद उन्नत हैं। सवा तीन घंटे की होने के बावजूद फिल्म कसी हुई है। दो-एक जगह ही ऐसा महसूस हुआ कि यह सीन दो-चार सैकिंड छोटा हो सकता था। सबसे कमाल है फिल्म के एक्शन सीक्वेंस। जब-जब पर्दे पर एक्शन हुआ है, पलकें झपकना भूल जाती हैं। राम-लक्ष्मण द्वारा ताड़का-सुबाहू वध, रावण और सूर्पनखा के पति विद्युतजीव के बीच की लड़ाई, खर-दूषण के साथ राम का युद्ध या फिर रावण-जटायू का युद्ध, इन्हें देखना अचंभित कर देता है। अचंभित तो यह फिल्म अपने हर एक दृश्य से करती है। रसातल, अयोध्या, जनकपुर, लंका या विशाल वनक्षेत्र, वी.एफ.एक्स. से रचे जाने के बावजूद ये सब बेहद लुभावने और विश्वसनीय बन पड़े हैं। सच तो यह है कि यह विश्वसनीयता ही इस फिल्म को दिलों में उतारती है। इस फिल्म को 3-डी में देखेंगे तो यह और अधिक असर करेगी।
फिल्म (Ramayana Part 1) की कास्टिंग को लेकर काफी कुछ कहा गया कि कौन कलाकार किस किरदार में फिट रहा या नहीं। ऐसे सवाल दर्शक-मन के पूर्वाग्रहों से उपजते हैं कि हमने एक बार किसी को किसी भूमिका में देख लिया तो उसे दूसरे किरदार में कैसे देखें? या एक बार कोई राम या सीता बन गया तो कोई दूसरा कैसे बनेगा? सच यह है कि जब आप यह फिल्म देखने बैठते हैं तो पर्दे पर आने वाले कलाकार धीरे-धीरे किरदार होने लगते हैं। किसी को बड़ी या दमदार भूमिका मिली तो वह भारी लगने लगता है और किसी को कम संवाद या सीन मिले तो वह हल्का। जबकि सच यह है कि इस फिल्म में किसी भी कलाकार का अभिनय खराब नहीं है। दशरथ बने अरुण गोविल, रावण बने यश और मंथरा बनीं शीबा चड्ढा अधिक प्रभावित करते हैं। राम बने रणबीर कपूर और सीता बनीं सई पल्लवी अपने चरित्रों को पूरी गरिमा से निभाते हैं। इन्हें देख कर मन में वात्सल्य और श्रद्धा उत्पन्न होती है। वहीं कैकसी बनीं शोभना, कैकेयी बनीं लारा दत्ता, सूर्पनखा बनीं रकुलप्रीत सिंह, विद्युतजीव बने विवेक ओबरॉय लक्ष्मण बने रवि दुबे, जटायू की आवाज़ में अनुपम खेर, रावण की आवाज में शरद केलकर, मारीच बने सौरभ सचदेवा जैसे तमाम कलाकार अपनी-अपनी क्षमता अनुसार बेहद प्रभावी रहे हैं।
‘रामायण’ (Ramayana) भारतीय सिनेमा को एक नई ऊंचाई पर लेकर जाने वाली फिल्म है। इसे देखते हुए आप इस भारत भूमि पर, यहां जन्मे नायकों पर तो गर्व कर ही सकते हैं, यह सोच कर भी गौरवान्वित हो सकते हैं कि यह देश ऐसी भव्य-दिव्य फिल्म भी बना सकता है। यह फिल्म ग्लोबल सिनेमा का एक सशक्त उदाहरण है। इसे देखिए, अचंभित होइए, चकित होइए, गर्वित होइए। और हां, इसे देखते हुए मन को किंचित भक्तिमय रखिएगा। विश्वास कीजिए, फिल्म खत्म होने पर आप स्वयं को राममय पाएंगे।
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Release Date-05 November, 2026 in theaters
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)
