-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
जब आपको पता चलता है कि ‘मेरठिया गैंग्स्टर्स’ (Meeruthiya Gangsters) उन ज़ीशान कादरी ने लिखी और डायरेक्ट की है जिन्होंने अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ लिखी थी तो इस फिल्म से आपकी उम्मीदें बढ़ जाती हैं। लेकिन जब आप यह फिल्म देखते हैं तो यह आपकी उन बढ़ी हुई उम्मीदों पर पानी फेरती है। लगता है जैसे ज़ीशान के पास जो कुछ बढ़िया था वह उन्होंने ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में दे दिया और जो थोड़ी-बहुत खुरचन बची, उसे लेकर उन्होंने यह फिल्म बना दी।
पश्चिमी उत्तरप्रदेश के अपराध-जगत की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म (Meeruthiya Gangsters) इस किस्म के फ्लेवर की अन्य फिल्मों के मुकाबले काफी कमज़ोर नज़र आती है जिसमें चंद बेरोज़गार युवा ज़िंदगी में आगे बढ़ने और कुछ हासिल करने के लिए बिना किसी डर या पश्चाताप के अपराध के रास्ते को अपनाते चले जाते हैं। फिल्म की खासियत है इसके किरदार जिन्हें कायदे से गढ़ा गया है लेकिन इनके इर्द-गिर्द की कहानी, जिन हालात में यह रहते हैं, या जो इनकी सोच है, उसे लेकर फिल्म काफी कमज़ोर रवैया अपनाती है और इसीलिए बिना कुछ कहे बस, एक ऐसी कहानी दिखाती चली जाती है जिसमें कुछ भी ठोस नहीं है। फिर इस फिल्म (Meeruthiya Gangsters) का नाम भी इस पर पूरी तरह से फिट नहीं बैठता है। लगता है जैसे दर्शकों को खींचने भर के लिए इसे एक ‘कैची’ नाम दे दिया गया हो।
जयदीप अहलावत, आकाश दहिया, संजय मिश्रा, नुसरत भरूचा, जतिन सरना, मुकुल देव, बृजेंद्र काला जैसे कलाकार अपने काम में मेहनत करते दिखाई देते हैं। फिल्म का म्यूज़िक साधारण है जो इसमें जबरन ठूंसा गया लगता है। फिल्म (Meeruthiya Gangsters) में एक किस्म का कच्चापन है जो इसे मज़बूत नहीं होने देता लेकिन राहत की बात यह है कि यह फिल्म आपको पकाती नहीं है। इसीलिए सिंगल स्क्रीन थिएटरों और छोटे सैंटर्स के मारधाड़ वाली फिल्में पसंद करने वाले दर्शकों को यह फिल्म पसंद आ सकती है। फैमिली या कपल ऑडियंस तो खैर, इसका नाम सुन कर ही इससे दूर हट जाएंगे।
अपनी रेटिंग-2 स्टार
(नोट-18 सितंबर, 2015 को इस फिल्म की रिलीज़ के समय मेरा यह रिव्यू किसी पोर्टल पर प्रकाशित हुआ था।)
(Release date-18 September, 2015)

(दीपक दुआ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिज़ाज से घुमक्कड़। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य हैं और रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)