-दीपक दुआ…
इस फिल्म ‘उड़ता तीर’ (Udta Teer) की कहानी तो इसका ट्रेलर ही पूरी तरह से बता देता है कि भारत के जासूसों से परेशान पाकिस्तान ने अपना एक बंदा भारत में भेजा हुआ है। एक हादसे में इस बंदे की याद्दाश्त चली जाती है। उसे अब देशभक्ति तो याद है लेकिन देश याद नहीं है। कभी पाकिस्तान को खबरें भेजने वाला बंदा अब जय हिन्द कहते हुए पाकिस्तान से आए बंदों को चुन-चुन कर मार रहा है।
‘धुरंधर’ के आने के बाद यह तो खैर तय हो गया था कि अब जब कभी भी हिन्दी सिनेमा के पर्दे पर जासूसों, एजेंटों की बात होगी, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान की बात होगी तो उसे सीधे ‘धुरंधर’ से तौला जाएगा। यही कारण है कि यशराज जैसे बड़े बैनर से आई बड़े-बड़े सितारों वाली ‘ऐल्फा’ को क्रिटिक्स और पब्लिक ने जम कर धोया था। ‘उड़ता तीर’ (Udta Teer) बनाने वालों ने समझदारी यह दिखाई है कि इन्होंने अपनी फिल्म को कॉमेडी के रैपर में ऐसा लपेटा है कि यह कहीं कॉमिक्स नुमा, कहीं स्पूफ नुमा तो कहीं सेटायर नुमा होती हुई आपको हंसाती रहती है। हास्य का यही तड़का इस फिल्म को देखने लायक बनाता है।
(रिव्यू-छोल्जर छोल्जर ‘ऐल्फा’ छोल्जर)
फिल्म (Udta Teer) अपनी शुरूआत से ही हंसाने लगती है। कभी अपने किरदारों के मैनरिज़्म से, कभी संवादों के चुटीलेपन से, कभी घटनाओं की उठापटक से तो कभी पाकिस्तानियों का मज़ाक उड़ाते हुए। इसे लिखने वाले आकाश कौशिक और दीया वालिया पहले भी कई कॉमेडी फिल्मों से जुड़े रहे हैं तो उन्हें पता है कि एक आम दर्शक को कैसे हंसाया जाता है। कॉमेडी के मामले में यह फिल्म अच्छे नंबरों से पास होती है। लेकिन दिक्कत तब आती है जब यह फिल्म सचमुच भारत-पाकिस्तान के मुद्दों में जा उलझती है। यहां आकर यह कन्फ्यूज़ करती है, अटकती है और अपना बना-बनाया ट्रैक छोड़ कर भटकने लगती है। ऐसा लगता है कि लिखने वाले कहानी को फैला तो गए लेकिन समेटते हुए घबरा गए। उनकी यह घबराहट इस फिल्म को सैकिंड हॉफ में कमज़ोर कर देती है। ऐसा भी महसूस होता है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘धुरंधर’ के बाद फिल्म की मूल स्क्रिप्ट में कुछ बदलाव किए गए हैं। जितनी उम्मीद के साथ यह फिल्म शुरू होती है, अंत तक आते-आते वह उम्मीद थोड़ी फीकी पड़ जाती है।
आकाश कौशिक ने पहली बार निर्देशन की कमान संभाली है और इस मोर्चे पर वह कामयाब भी रहे हैं। उन्होंने इस फिल्म का फ्लेवर ऐसा रखा है कि दर्शक इसमें लॉजिक तलाशने की बजाय मनोरंजन तलाशे। वरना पूछने वाले तो ‘ऐल्फा’ की तरह यहां भी पूछेंगे कि अच्छा जी, इत्ते सारे पाकिस्तानी हमारे सिस्टम में आ घुसे, ऐसे कैसे? कहानी के मुख्य ट्रैक के इर्दगिर्द छितराए छोटे-छोटे धागों को भी उन्होंने बखूबी ताने रखा है। आयुष्मान खुराना, सारा अली खान, राहुल बोस, स्मिता तांबे, मुकुल देव, गुलशन ग्रोवर, राम कपूर, सुप्रिया पिलगांवकर, बृजेंद्र काला, सुहैल नैयर, रघुवीर यादव, संदीप आनंद जैसे सभी कलाकारों ने खूब बढ़िया काम किया है। गाने-वाने, एक्शन-वेक्शन बढ़िया है।
तो, बेहतर यही है कि लॉजिक-वॉजिक भूल कर इस फिल्म (Udta Teer) को इसके खालिस मनोरंजन के लिए देखा जाए, इससे उपजने वाले हास्य के लिए देखा जाए, इसमें बार-बार आते गुदगुदाते पलों के लिए देखा जाए। बहुत बड़ी उम्मीदें न लगाते हुए इस फिल्म को एन्जॉय करेंगे तो यह पैसा वसूल एंटरटेनमैंट देगी वरना…!
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Release Date-23 October, 2026 in theaters
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)
