रिव्यू-‘बोल’ न हल्के-हल्के…
-दीपक दुआ... ‘मारना ही जुर्म क्यों है, पैदा करना क्यों नहीं…?’ ‘जब खिला नहीं सकते तो पैदा क्यों करते हो…?’ ...
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