-दीपक दुआ…
‘कंजक’ यानी कन्यापूजन का दिन है। घर में अफरातफरी मची हुई है। आंटी जी किचन में बिज़ी हैं और अंकल जी की पूजा ही खत्म नहीं हो रही है। लेकिन सबसे ज़रूरी बात-पूजन के लिए कन्याएं लाने वाली ‘दीदी’ अभी तक लापता है। आंटी झींक रही हैं, सब पर चिल्ला रही हैं। तभी ‘दीदी’ आती है और उसके साथ आती है कन्याओं की फौज। अफरातफरी अब चिल्ल-पौं में बदल जाती है। ‘दीदी’ आंटी की मदद करवाने लगती है, सारा काम संभाल लेती है। कन्या पूजन निबटता है कि अचानक…!
प्रसिद्ध रंगकर्मी व साहित्यकार सच्चिदानंद जोशी की लघु-कथा ‘कंजक का कंझट’ पर बनी यह शॉर्ट फिल्म ‘कंजक’ (Kanjak) नवरात्रि के दौरान होने वाले कन्या पूजन के माध्यम से भारतीय संस्कृति के उस मूल तत्व को सामने लाती है जिसमें सामाजिक समरसता और अपनत्व के भाव की प्रधानता है। मेलजोल और सौहार्द का संदेश देती इस फिल्म के अंतिम 10-15 सैकिंड में कहानी का रुख पलटता है। इसके ठीक बाद संत कबीर की पंक्तियां आकर फिल्म को चरम पर ले जाती हैं और मन करता है कि वह गीत चलता रहे, यह कहानी कुछ और आगे बढ़े।
युवा फिल्मकार राहुल यादव के सधे हुए निर्देशन में बनी 14 मिनट की यह फिल्म ‘कंजक’ (Kanjak) राहुल की प्रतिभा को खुल कर दिखाती है जिसमें वह तकनीकी पक्षों के अलावा दृश्य संयोजन की अपनी कलाकारी का प्रभावी प्रदर्शन करते हैं।
‘कंजक’ (Kanjak) में मुख्य भूमिकाएं खुद लेखक सच्चिदानंद जोशी और उनकी पत्नी मालविका जोशी ने निभाई हैं। ‘दीदी’ के किरदार में सवलीन कौर अपनी बातूनी और चुलबुली भूमिका से न्याय करती हैं। राहुल यादव और सलाम बालक ट्रस्ट के बच्चों ने भी इसमें विभिन्न किरदार निभाए हैं। कैमरा, साउंड, संपादन की तकनीकी दक्षता का असर फिल्म में साफ दिखाई देता है। फिल्म खत्म होती है तो मन कुछ द्रवित-सा महसूस होता है। यही इस फिल्म की सफलता है।
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Release Date-14 February, 2026 on YouTube
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ-साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब-पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)