-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
इस फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) का ट्रेलर देखिए तो पता चलता है कि एक युवक (जो भारतीय एजेंट हो सकता है), पाकिस्तान के लयारी टाऊन में पहुंचता है जिसके बाद बेहिसाब खून-खराबा शुरू हो जाता है क्योंकि भारत के खुफिया ब्यूरो के एक बड़े अफसर का कहना है-मुंह तोड़ने के लिए मुठ्ठी बंद करना ज़रूरी है। पर क्या आपने इससे पहले कभी लयारी के बारे में सुना था…?
दरअसल पाकिस्तान की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाले कराची शहर का एक बहुत पुराना और ऐतिहासिक इलाका है लयारी। इस इलाके की अहमियत इतनी है कि इसे ‘कराची की मां’ तक कहा जाता है। ऐसा इलाका जहां पख्तून, बलूच, सरायकी, सिंधी, कच्छी, मुहाजिर जैसी कई सारी कौमें मिल-ठन कर रहती हैं। कोई वक्त था जब यहां बलूचों और पख्तूनों (पठानों) में हमेशा तलवारें खिंची रहती थीं। दोनों के अपने-अपने गैंग थे जो अक्सर आपस में भिड़ते रहते थे। दोनों की सरपरस्त अपनी-अपनी राजनीतिक पार्टियां थीं। बलूच गैंग के सरदार रहमान डकैत (जी हां, यही नाम था उसका) के सिर पर पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी का हाथ था जिसके लिए रहमान लयारी में वोटों का इंतज़ाम करता था और बदले में अपने काले धंधे चलाता था। फिर एक वक्त आया जब खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति (जी हां, सही पढ़ा आपने, खुद वहां के राष्ट्रपति) ने रहमान डकैत को आशीर्वाद देकर उसकी एक अलग पॉलिटिकल पार्टी बनवा दी। धीरे-धीरे इन गैंग्स्टर लोगों का आतंक वहां इतना ज़्यादा बढ़ गया कि पहले 2012 और फिर 2013 में पाकिस्तानी सरकार ने इनके खिलाफ जंग छेड़ दी जिसे ‘ऑपरेशन लयारी’ कहा गया। यह फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) उसी ऑपरेशन के पीछे की कहानी दिखाती है, आगे की कहानी इस फिल्म के अगले पार्ट में दिखाई जाएगी जो मार्च, 2026 में रिलीज़ होगा।
यह फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) दिखाती है कि पहले 1999 के कांधार विमान हाईजैक और फिर 2001 के भारतीय संसद पर हमले के बाद भारतीय खुफिया विभाग के अफसर अजय सान्याल (मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से प्रेरित किरदार) ने पाकिस्तान में अपने एक ऐसे एजेंट को स्थापित किया जिसने लयारी के बलूच गैंग में घुस कर बढ़त बनाई। सान्याल का मानना था कि पाकिस्तान के आतंकवादी इन अपराधियों की मदद से ही हथियार आदि हासिल करते हैं और वहां की राजनीति भी इनके दम पर चलती है, सो इन्हें तबाह करना ज़रूरी है। यह एजेंट कैसे इस गैंग के करीब पहुंचता है, कैसे अंदर घुसता है और बढ़त बनाते-बनाते एक दिन…!!!
इस फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) में स्पाई थ्रिलर के रंग हैं, गैंग-वॉर फिल्मों के रंग हैं, पॉलिटिकल थ्रिलर फिल्म के रंग हैं और बड़ी बात यह है कि ये सारे के सारे रंग आपस में मिल कर इस फिल्म को एक शानदार और जानदार लुक देते हैं जिसके दम पर यह फिल्म हिन्दी की मसाला फिल्मों के मैदान में छाती ठोक कर आ खड़ी हुई है। आदित्य धर ने इस छह-सात घंटे की फिल्म (यह वाली साढ़े तीन घंटे की है, अगली वाली भी इतनी तो होगी ही) को जिस तरह से कस कर लिखा है, उससे स्क्रिप्ट-राईटिंग का सबक लिया जा सकता है। एक साथ कई ट्रैक्स पर चलते कहानी के विभिन्न हिस्से, किस्म-किस्म के किरदार लेकिन कोई झोल नहीं, कोई लचक नहीं। ज़्यादातर किरदारों का असल लोगों पर आधारित होना फिल्म के तेवर को और तीखा बनाता है। संवाद न सिर्फ मारक हैं बल्कि असरदार और सामयिक भी जिनमें उस दौर और उसके बाद आने वाले समय की झलक मिलती है। उस दौर की घटनाओं को कहानी में पिरो कर कल्पना और तथ्यों का जो अद्भुत मेल आदित्य धर ने किया है उसके लिए उनकी लिखाई की तारीफ होनी चाहिए।
इस फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) को आदित्य धर ने बतौर निर्देशक जो लुक दी है, वह बेमिसाल है। लयारी टाऊन की गलियां, वहां के लोग, उनकी बोली, रहन-सहन तो असरदार हैं ही, फिल्म का एक्शन अनोखा है जिसमें बेशुमार हिंसा है। कई सीन तो इस कदर वीभत्स हैं कि कमज़ोर दिल वाले लोग उन्हें देख तक नहीं सकेंगे। खासतौर से एक एजेंट को यातना देने वाला सीन (जो ट्रेलर में भी है) बेहद जुगुप्सा जगाता है। लेकिन सच यही है कि जब कोई एजेंट किसी दुश्मन मुल्क के हाथ लगता है तो उसके साथ जो होता है, वह सिनेमा के पर्दे पर दिखाया भी नहीं जा सकता।
फिल्म तकनीकी तौर पर बेहद उन्नत है। कैमरा तो जैसे आपको सम्मोहित कर देता है। फिल्म शुरू होते ही आप पर्दे के और पर्दा आपका हो जाता है। लोकेशन, सैट्स, स्पेशल इफैक्ट्स बेहद प्रभावी हैं। रंगों, पोशाकों और मेकअप का बेहद सलीके से इस्तेमाल किया गया है। बैकग्राउंड म्यूज़िक फिल्म की जान बढ़ा देता है। एडिटिंग ऐसी कट-टू-कट है कि आप पलक तक न झपका सकें। हां, दो-एक जगह यह भी लगा है कि इस सीन को दो-एक सैकिंड काटा जा सकता था। अंत में सुभाष घई की ‘कर्मा’ वाले एक ट्विस्ट का आना थोड़ा ‘फिल्मी-सा’ भी लगता है। गाने-वाने फिल्म के लिहाज़ से ठीक बन पड़े हैं। बड़ी बात यह है कि साढ़े तीन घंटे की लंबाई होने के बावजूद आठ चैप्टर्स में बंटी यह फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) अखरती नहीं है और अपने अगले पार्ट की घोषणा के बावजूद यह अपने-आप में एक मुकम्मल फिल्म है। फिल्म ‘ए’ सर्टिफिकेट वाली है सो नाबालिग लोग इसे न देखें।
हर कलाकार ने दम लगा कर काम किया है। रणवीर सिंह चुप रहे, बोले, पिटे या पीटें, दिल जीतते रहे। अक्षय खन्ना बूढ़े शेर हो चुके हैं, पंजा उठा दें तो लोग सहम जाते हैं। आर. माधवन अभिनय का स्कूल लगते हैं। अर्जुन रामपाल, संजय दत्त, सौम्या टंडन, दानिश पंडोर, मानव गोहिल, नवीन कौशिक, गौरव गेरा, पल भर को आईं मधुरजीत सरगी, आकाश खुराना, संजय मेंहदीरत्ता जैसे तमाम कलाकार अपने किरदारों में जान फूंकते रहे। सारा अर्जुन बहुत प्यारी लगीं, मासूम लगीं और जब मौका मिला तो बता गईं कि उन्हें असरदार अभिनय भी आता है। राकेश बेदी ने मतलब परस्त नेता के अतरंगी किरदार में जो असर छोड़ा है उसके लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।
इस फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) में पर्दे पर जब भारत की छाती पर लगने वाले ज़ख्मों के सीन आते हैं तो आप पसीजती हथेलियां मलने के अलावा कुछ नहीं कर पाते। यह फिल्म उन ज़ख्मों की याद दिलाने के साथ-साथ यह अहसास भी दिलाती है कि जब तक देश पर मर-मिटने वाले कुछ सनकी लोग मौजूद हैं, हम महफूज़ हैं। यह फिल्म उन अनजान लोगों को सलाम करती है जो बेखुद होकर वतन की खातिर अपनी पूरी ज़िंदगी कुर्बान कर देते हैं और हम उनका नाम जानना तो दूर, अहसान तक नहीं मानते।
(रेटिंग की ज़रूरत ही क्या है? रिव्यू पढ़िए और फैसला कीजिए कि यह कितनी अच्छी या खराब है। और हां, इस पोस्ट के नीचे कमेंट कर के इस रिव्यू पर अपने विचार ज़रूर बताएं।)
Release Date-5 December, 2025 in theaters
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)


बहुत ही शानदार एवं जानदार रिव्यू
गज़ब ❤️❤️❤️❤️
धन्यवाद भाई साहब…
बेहद शानदार समीक्षा दीपक जी 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻👏🏻
धन्यवाद भाई साहब…
बेहतरीन रिव्यू है दीपक भाई साहब
धन्यवाद भाई साहब…
बहुत दिनों बाद कोई मूवी देखने लायक लग रही है । रिव्यू शानदार है तो मूवी भी शानदार होगी । आज देखते है ।
धन्यवाद…
Behtereen Sir
Iss review ka kab se intezaar tha!
thanks…
बढ़िया रिव्यू l वैसे बड़े ही मिक्स रिव्यूज हैं इस फिल्म के l
पर हमें तो सारा के लिए देखनीं है,
अपनी बच्ची है, नजदीकी मित्र की बिटिया l
शुक्रिया सारा को इतने खूबसूरत अल्फाजों से नवाजनें के लिए l
ये समीक्षा मैं सारा के फ़ादर राज अर्जुन तक पहुँचा रही हूँ l
धन्यवाद… राज भाई का थैंक्स आ चुका है…
दमदार रिव्यु❤️❤️
धन्यवाद
बेहद सटीक समीक्षा 🙏🏻🙏🏻👌👌
धन्यवाद