-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
साई राम टुटेजा फिज़िक्स पढ़ाते हैं लेकिन वास्तुशास्त्र और ज्योतिष आदि पर उनका अटूट विश्वास है। वह एक परफैक्ट 90 डिग्री उत्तर दिशा वाला मकान खरीदने के लिए भटक रहे हैं। काफी मशक्कत के बाद उन्हें ऐसा एक प्लॉट मिलता है जिस पर वह मकान बनवा भी लेते हैं। पर जहां उस मकान पर कई दूसरे लोगों की नज़र है वहीं भ्रष्ट सरकारी अफसर भी बीच में फच्चर फंसा रहे हैं। ऐसे में साई राम क्या करेंगे? सहारा लेंगे अपने विश्वास का या फिर चलेंगे तिकड़म भरी कोई चाल? यह फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ (Uttar Da Puttar) इन्हीं सब बातों को हल्के-फुल्के ढंग से देखती और दिखाती है।
‘जुगाड़’, ‘अनारकली ऑफ आरा’ और ‘भोंसले’ जैसी फिल्में बना चुके निर्माता संदीप कपूर अपनी इस चौथी फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ (Uttar Da Puttar) से लेखक भी बन बैठे हैं। उनकी लिखी कहानी दिलचस्प है कि कैसे फिज़िक्स पढ़ाने वाला एक नामी प्रोफेसर असल जीवन में वास्तु और ज्योतिष में इस कदर उलझा हुआ है कि उसकी निजी ज़िंदगी ही उलझ कर रह गई है। दिल्ली शहर में मनचाहा मकान बनवाने के लिए जिस तरह से इंसान की ज़िंदगी उलझ कर रह जाती है, उसका रोचक चित्रण इस कहानी में है। निर्देशक रवींद्र सिवाच ने इस कहानी को दिलचस्प अंदाज़ में फैलाया और फिल्माया है जिससे इसका हल्का-फुल्का फ्लेवर पूरी फिल्म में लगातार बना रहा है।
लेकिन इस फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ (Uttar Da Puttar) की स्क्रिप्ट में कुदरती प्रवाह की बजाय लेखक की मनमर्ज़ी का बहाव अधिक है। हालांकि अतरंगी किरदारों, दिलचस्प घटनाओं और चटपटे संवादों से फिल्म बोर नहीं होने देती है लेकिन साई राम की मुश्किलों का हल जिस तरह से निकला या निकाला गया है, वह बहुत अधिक प्रभावी भी नहीं बन पड़ा है। लग रहा था कि फिल्म ‘खोसला का घोसला’ वाली पटरी पर जाएगी लेकिन यह ऐसे रास्ते पर निकल पड़ी जिस पर सारे काम संयोगों से हो रहे हैं। दुबई वाला बदमाश इस कदर फट्टू न निकलता तो…? उसकी बीवी का फोन न आता तो…? फिर अपनी पूरी कसरत में यह फिल्म वास्तु और ज्योतिष जैसी विद्याओं को जिस तरह से फिज़ूल साबित कर देती है, वह भी तो किसी को अखर सकता है। सैकिंड हॉफ में कुछ जगह सपाट हुई यह फिल्म कुछ चुटीली घटनाओं से उठाई जाती तो बेहतर होता।
अपने दमदार कलाकारों के सधे हुए अभिनय के लिए इस फिल्म (Uttar Da Puttar) को देखा जाना चाहिए। अन्नू कपूर अपने किरदार से अधिक उम्र के लगने के बावजूद जंचे हैं। बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, राजेंद्र सेठी, सुमित गुलाटी, इश्तियाक खान, जीवेशु आहलूवालिया, नितिन अरोड़ा, नासिर अब्दुल्ला, रुखसार रहमान जैसे सभी कलाकारों ने असरदार काम किया है। रोहित शर्मा का संगीत फिल्म के मिज़ाज को भाता है।
थोड़ा और चुटीलापन, थोड़ा और मिर्च-मसाला, थोड़ी और नाटकीयता से यह फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ (Uttar Da Puttar) अधिक चटपटी बन सकती थी। मगर अभी भी इसे देखते हुए आप मुस्कुराते हैं, साफ-सुथरा मनोरंजन पाते हैं, यह इसकी सफलता है।
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Release Date-24 July, 2026 in theaters
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)
