-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
किसी निर्दोष को मारना हत्या कहलाता है और किसी अत्याचारी या दुष्ट को मारना वध। लेकिन कानून की नज़र में तो हर हत्यारा दोषी ही होगा न? और किसी को जान से मारा जाए तो वह हत्या होगी या वध यह कौन तय करेगा? 2022 में आई ‘वध’ में एक अधेड़ दंपती ने अपने घर में घुस कर उन्हें परेशान करने वाले दबंग का ‘वध’ किया था। अब ‘वध 2’ (Vadh 2) में मामला घर के अंदर का नहीं, जेल के अंदर का है।
मंजू सिंह 28 बरस से जेल में बंद है। अब उसकी रिहाई होने वाली है। जल्द रिटायर होने वाले जेल के एक सिपाही शंभूनाथ मिश्रा के साथ उसका दोस्ताना है। जेल में बंद एक दबंग से हर कोई परेशान है। एक दिन वह गायब हो जाता है। कहां गया वह? क्या उसे मार दिया गया? उसकी लाश कहां गई? मिली या नहीं? मिली तो कहां, कैसे? और यह हत्या थी या वध? किसने मारा उसे? कैसे मारा?
जेल के अंदर की दुनिया, वहां के पात्रों पर बनने वाली कहानियां अक्सर फिल्मों, वेब-सीरिज़ में आती रहती हैं। अपने यहां की जेलों में अपराध, अनैतिकता, भ्रष्टाचार का बोलबाला रहता है तो इन कहानियों में भी यही सब दिखाया जाता है। यही कारण है कि इस किस्म की कहानियां ज़्यादातर लोग रूचि ले कर देखना पसंद नहीं करते क्योंकि इनमें अवसाद, घृणा, गंदगी, अत्याचार आदि दिखता है। अधिकांश दर्शक न तो इन सब से खुद को जोड़ पाते हैं और न ही इसमें ‘मनोरंजन’ तलाश पाते हैं। लेकिन लेखक-निर्देशक जसपाल सिंह संधू ने ‘वध 2’ (Vadh 2) की कहानी में आवश्यक उत्सुकता बनाए रखी है जिस वजह से यह बांधे रखती है। अंत में आने वाले ट्विस्ट इसे पूर्णता देते हैं।
कहानी की कई बातें सटीक हैं। जेल के भीतर की दुनिया की झलक वास्तविक लगती है। एक बाहुबली के दबंग भाई का दबदबा बताता है कि हर कोई या तो बिकता है या डरता है। अधेड़ जोड़े की दूर-दूर की दोस्ती अच्छी लगती है। कानून को कैसे तोड़ा-मरोड़ा जा सकता है, यह भी दिखता है। इन सबके बीच ‘वध 2’ (Vadh 2) जैसी करनी वैसी भरनी का संदेश भी देती है।
लेकिन ‘वध 2’ (Vadh 2) की कहानी की धीमी चाल इसे हल्का बनाती है। कई सीन अनावश्यक तौर पर लंबे हैं। पटकथा कुछ एक जगह डगमगाती दिखती है। निर्देशन और संपादन में और कसावट हो सकती थी। बीच-बीच में यह फिल्म अपना बुना हुआ तनाव ढीला करती जाती है जिससे यह अच्छी होते-होते औसत हो जाती है। लोकेशन, कैमरा वर्क प्रभावी रहे हैं।
संजय मिश्रा, नीना गुप्ता, कुमुद मिश्रा, योगिता बिहानी, शिल्पा शुक्ला, अक्षय डोगरा, अमित के. सिंह आदि का अभिनय उम्दा है। इनके काम के लिए ‘वध 2’ (Vadh 2) देखी जा सकती है। जेल के अंदर की दुनिया के काले सच के लिए भी इसे देखा जा सकता है, यदि कोई देखना चाहे तो।
(इस फिल्म ‘वध 2’ का ट्रेलर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)
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Release Date-06 February, 2026 in theaters
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)
