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रिव्यू-उम्मीदों का एनकाऊंटर करती ‘घमासान’

Deepak Dua by Deepak Dua
2026/09/13
in CineYatra, फिल्म/वेब रिव्यू
0
रिव्यू-उम्मीदों का एनकाऊंटर करती ‘घमासान’
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-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)

मध्य भारत के डकैतों की बात होती है तो चंबल नदी के आसपास के बीहड़ वाले डाकू (ओह सॉरी, बीहड़ में बागी होत हैं, डकैत होत हैं पार्लामैंट में) ही याद आते हैं। यही कारण है कि किसी ज़माने में कुख्यात रहे डकैत ददुआ यानी शिव कुमार पटेल को भी चंबल से जोड़ लिया जाता है जबकि उसका इलाका उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में माणिकपुर के आसपास का पाठा (पठारी) क्षेत्र था। कभी बीहड़ की फूलन देवी पर बनी कमाल की फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ से जुड़े रहे और वहीं के पान सिंह तोमर पर ‘पान सिंह तोमर’ नाम से एक उम्दा फिल्म दे चुके फिल्मकार तिग्मांशु धूलिया अब पाठा के ददुआ पर यह फिल्म ‘घमासान’ (Ghamasaan) लेकर आए हैं। मगर क्या यह फिल्म उन दो फिल्मों की तरह शानदार बन पाई है? आइए देखते हैं।

कहा जाता है कि ददुआ एक खूंखार डकैत था जिस पर डकैती, अपहरण, हत्या जैसे ढेरों मामले थे। कभी जंगल से बाहर नहीं निकला इसलिए पुलिस के पास उसकी फोटो तक नहीं थी। पुलिस में उसके हमदर्द थे, स्थानीय लोग उसके समर्थक थे और बड़े नेताओं से उसकी दोस्ती थी इसीलिए वह 25-30 साल तक अपना साम्राज्य चलाता रहा। मगर 2007 में आई.पी.एस. अफसर अमिताभ यश की अगुआई में बनी स्पेशल टास्क फोर्स ने उसे मार गिराया। ज़ी-5 पर आई यह फिल्म (Ghamasaan) इस कहानी के प्रमुख पात्रों के नाम बदल कर वही सब दिखा रही है। यह और बता दूं कि यह फिल्म (Ghamasaan) सैंसर से पास होकर पौने तीन साल तक अटकी रही और अब रिलीज़ हुई है। 

दस्यु सम्राट महाराज और टास्क फोर्स की इस पकड़म-पकड़ाई में महाराज को खूंखार दिखाना था और आई.पी.एस. अफसर आदित्य सिंह को चौकन्ना-चालाक। लेकिन पूरी फिल्म में महाराज को खाट तोड़ते, अंगड़ाइयां लेते, फोन पर डरते और डराते दिखाया गया। अब एक सीन देखिए-अपनी शादी की सालगिरह की पार्टी में आदित्य बाल्कनी से कूद कर एक बदमाश को काबू में करते हैं और सारे मेहमान डर कर पार्टी छोड़ कर चले जाते हैं। अब सोचिए कि जिस फिल्म (Ghamasaan) की लिखाई इस कदर कमज़ोर कलम से की गई हो, उसे देखने की उत्सुकता भला हो भी तो क्यों?

हालांकि लिखने वालों ने महाराज और आदित्य के बीच तनाव बुनने की भरसक कोशिश की है लेकिन कहानी के जाने-पहचाने मोड़ इस तनाव की बुनाई को हल्का करते चले जाते हैं। महाराज की राजनीति ताकत, मंत्री, पुलिस से सीधी डील आदि बताती है कि अपने यहां सत्ता और अपराध के गठबंधन की जड़ें कितनी गहरी हैं। इस फिल्म (Ghamasaan) की स्क्रिप्ट का चलते-चलते लचक जाना और कहीं एकदम पैदल हो जाना इसके असर को गाढ़ा नहीं होने देता। क्लाइमैक्स बहुत ही थका हुआ है।

तिग्मांशु धूलिया ने रियल लोकेशंस का सटीक इस्तेमाल करते हुए हालांकि फिल्म (Ghamasaan) की लुक को विश्वसनीय बनाया है लेकिन फिल्म में से उनका वह वाला टच गायब है जो कभी उनका हस्ताक्षर हुआ करता था। इसे देखते हुए लगता है जैसे उन्होंने इसे किसी और से बनवा कर अपना नाम चिपका दिया हो। कुछ एक सीन ही असरदार बन पाए हैं वरना बहुत बार तो गैरज़रूरी सीन आकर पहले से ही हल्के चल रहे मामले को और अधिक पतला कर देते हैं।

आदित्य बने प्रतीक गांधी ऐसे सीधे-सपाट किरदारों को ठीक से निभा लेते हैं। अरशद वारसी ने ज़ोर तो खूब लगाया लेकिन लिखने वालों ने महाराज के किरदार में दम ही नहीं डाला तो वह भी क्या करते। इशिता दत्ता खूबसूरत लगीं। सीमा आज़मी, जतिन गोस्वामी व दीपराज राणा जंचे। अन्य कलाकार साधारण रहे। इस फिल्म में अभिनय के सरताज बने राजपाल यादव। अपनी हर अदा, हर संवाद अदायगी से उन्होंने असर छोड़ा।

टाइम पास किस्म की फिल्म है। ज़ी-5 का सब्सक्रिप्शन ले रखा हो या किसी स्कीम में फ्री मिला हो तो ‘घमासान’ (Ghamasaan) को चलते-चलाते देखा जा सकता है। कोई बड़ी उम्मीद मत रखिएगा, एनकाऊंटर हो जाएगा उम्मीद का।

(रेटिंग की ज़रूरत ही क्या है? रिव्यू पढ़िए और फैसला कीजिए कि यह कितनी अच्छी या खराब है। और हां, इस पोस्ट के नीचे कमेंट कर के इस रिव्यू पर अपने विचार ज़रूर बताएं।)

Release Date-11 September, 2026 on ZEE5

(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)

Tags: Arshad Warsideepraj ranaghamasaanghamasaan reviewishita duttajatin goswamiparitosh sandpratik gandhirajpal yadavseema azmitigmanshu dhuliaZEE5
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