-दीपक दुआ… (This review is featured in IMDb Critics Reviews)
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी आखिर क्या थे? एक कवि, एक राजनेता, एक पत्रकार, ऐसे व्यक्ति जिसका कोई शत्रु न हो? दूरदर्शन के ओ.टी.टी. प्लेटफॉर्म ‘वेव्स’ पर मुफ्त में उपलब्ध निर्देशक अतुल पांडेय की यह डॉक्यूमैंट्री ‘शत-शत अटल’ (Shat-Shat Atal) देखिए तो लगता है कि इसके नाम के मुताबिक उनके एक-दो नहीं बल्कि सौ चेहरे थे।
बहुत ही गहरे शोध के साथ बनाई गई एक घंटे की यह डॉक्यूमैंट्री (Shat-Shat Atal) अटल जी के जीवन के विभिन्न पहलुओं को उनके इंटरव्यूज़, उनके दिए भाषणों, उनकी सुनाई कविताओं, उनके साथ काम कर चुके लोगों, वरिष्ठ पत्रकारों, नेताओं, नातेदारों की बातों और यादों के ज़रिए दिखाने का काम बखूबी करती है। इसे देखते हुए अटल जी के व्यक्तित्व के बारे में गहराई से जानने का अवसर तो मिलता ही है, उनकी जीवन-यात्रा से भी परिचय होता है। साथ ही यह डॉक्यूमैंट्री भारत की राजनीति के कई पड़ावों से होकर गुजरते हुए देश और काल की विभिन्न परिस्थितियों से भी हमें परिचित कराती है। भारतीय राजनीति के शलाका पुरुष के अपार विस्तार पाए हुए जीवन को मात्र एक घंटे में समेट पाना हालांकि असंभव है, लेकिन यह डॉक्यूमैंट्री जब खत्म होती है तो कोई अधूरापन महसूस नहीं होता और यहीं आकर इसका निर्माण सार्थक व सफल हो जाता है।
अटल जी के विभिन्न भाषणों के जिन अंशों को यह डॉक्यूमैंट्री (Shat-Shat Atal) दिखाती है उन्हें आज के समय में सुनते हुए यह भी आभास होता है कि वह मर्यादा पुरुष तो थे ही, कहीं न कहीं भविष्यदृष्टा भी थे। दशकों पहले कही गई उनकी बातें आज अधिक प्रासंगिक लगती हैं तो लगता है कि वह काल के कपाल पर उभर रहे भविष्य के चिन्हों को देख पाने में सक्षम थे। उनकी कविताएं यदि उनके व्यक्तित्व का अहसास कराती हैं तो उनके भाषण उन मर्यादाओं को प्रदर्शित करते रहे जिन्हें उन्होंने स्वयं तो अपनाया ही, दूसरों को भी उसे अपनाने के लिए प्रेरित किया। किसी सही बात पर अपने विपक्षियों की भी प्रशंसा करने का साहस रखने वाले अटल बिहारी वाजपेयी सार्वजनिक जीवन में बिना किसी मुखौटे के जिए और शायद इसीलिए भारत की राजनीति में उन जैसा कोई दूसरा राजनीतिज्ञ मिल पाना मुश्किल लगता है। उनकी ही एक कविता देखिए-‘इससे फर्क नहीं पड़ता कि आदमी कहां खड़ा है, पथ पर या रथ पर, तीर पर या प्राचीर पर, फांसी के तख्ते पर या दिल्ली के तख्त पर, फर्क इससे पड़ता है कि जहां खड़ा है, या जहां उसे खड़ा होना पड़ा है, वहां उसका धरातल क्या है।’
निर्माता अतुल गंगवार के जीवट से बनी यह डॉक्यूमैंट्री (Shat-Shat Atal) तकनीकी तौर पर भी उन्नत है। कैमरा एंगल हों, संपादन या फिर पार्श्व संगीत, सभी मिल कर इसे एक दर्शनीय रूप प्रदान करते हैं। अटल जी के चाहने वालों को ही नहीं बल्कि भारत, भारतीय राजनीति व कविता में रूचि रखने वालों को भी इसे अवश्य देख लेना चाहिए।
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Release Date-24 December, 2025 on Waves OTT
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म–पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ–साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब–पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)

