आखिर पढ़ना ही कौन चाहता है…?
-दीपक दुआ…
5 दिसंबर, 2025 को ‘धुरंधर’ की रिलीज़ के समय ही यह ऐलान कर दिया गया था कि ‘धुरंधर 2’ 19 मार्च, 2026 को रिलीज़ की जाएगी। ‘धुरंधर’ के पहले पार्ट को दर्शकों से जो दीवानगी मिली, उस फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर जो इतिहास रचा, वह किसी से छुपा नहीं है। यही कारण है कि ‘धुरंधर 2’ के आने की आहट तक ने भारतीय सिने-उद्योग पर गहरा असर डाला। ‘धुरंधर 2’ को ईद के उस मौके पर लाने का ऐलान किया गया जब सलमान खान की फिल्मों की कतार लगा करती थी, सलमान की फिल्म नहीं आती थी तब कोई दूसरा उस मौके का फायदा उठाता था। लेकिन ‘धुरंधर 2’ जैसी फिल्म जो सीधे-सीधे पाकिस्तान को आइना दिखा रही है, वह इस मौके पर आएगी, यह फिल्मी कारोबार के पंडितों के लिए भी अनोखा ऐलान था। खैर… रमज़ान के महीने में अक्सर बड़ी फिल्में नहीं आया करती थीं लेकिन इधर कुछ साल से यह चलन बदला और रमज़ान में फिल्में आने लगीं। मगर इस साल तो बॉक्स-ऑफिस ऐसे गहरे सन्नाटे में है जैसे ‘धुरंधर 2’ के स्वागत की तैयारी कर रहा हो। असल में यह तूफान से पहले की शांति है क्योंकि 19 मार्च को (और अब तो 18 मार्च की शाम को पेड प्रीव्यू की शक्ल में) जो आएगा वह सचमुच एक ऐसा तूफान होगा जो भारतीय बॉक्स-ऑफिस को थर्रा देगा। इसीलिए तो पूछ रहा हूं कि ‘धुरंधर 2’ का रिव्यू… आखिर पढ़ना ही कौन चाहता है…?
कोई स्वीकार करे या न करे लेकिन सच यही है कि अब किसी भी छोटी-बड़ी फिल्म के आने पर उसे देखने या न देखने का दर्शकों का इरादा दूसरों से मिलने वाले फीडबैक से काफी ज्यादा प्रभावित होता है। यह फीडबैक पेशेवर फिल्म समीक्षकों की तरफ से रिव्यूज़ की शक्ल में आए, यार-दोस्तों की सलाह से, या सोशल मीडिया की पोस्ट्स से। अगर पता चल जाए कि जिस फिल्म को हम देखने की योजना बना रहे हैं, वह काफी खराब है तो बहुतेरे दर्शक उसे देखने का इरादा रद्द कर देते हैं या ‘जब ओ.टी.टी. पर आएगी, तब सोचेंगे’ कह कर उसे देखना टाल देते हैं। इसी तरह से किसी फिल्म को देखें या न देखें का असमंजस पाले बैठे दर्शक को अगर किसी विश्वसनीय स्रोत से उसकी तारीफें सुनने को मिल जाएं तो वे उसे देखने चल पड़ते हैं। महंगी टिकटों और समय की तंगी के इस ज़माने में दूसरों से मिलने वाले रिव्यूज़ का महत्व बढ़ चुका है, इसमें कोई शक नहीं। लेकिन ‘धुरंधर 2’ किसी रिव्यू की मोहताज नहीं है। जिसने ‘धुरंधर’ देखी है, वह इसे ज़रूर देखेगा, आज नहीं तो कल, लेकिन देखेगा ज़रूर क्योंकि ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट असल में एक इंटरवल था। आप यूं मान लीजिए कि सात-साढ़े सात घंटे की एक फिल्म है जिसमें साढ़े तीन घंटे के बाद इंटरवल हुआ था और अब इंटरवल के बाद का हिस्सा रिलीज़ किया जा रहा है। तो क्या इंटरवल तक की फिल्म देख चुके लोगों को इंटरवल के बाद के हिस्से का रिव्यू सचमुच चाहिए…? जवाब है-नहीं, बिल्कुल नहीं।
अगर रिव्यू का ही इंतज़ार होता तो अब तक 100 करोड़ से ज़्यादा की इसकी टिकटें न बुक हुई होतीं। हालत यह है कि न सिर्फ ‘धुरंधर 2’ के आने से पहले मैदान खाली किया गया बल्कि उसके साथ आने का दम भर रही ‘टॉक्सिक’ तक ने अपनी रिलीज़ टाल ली और अब अगले दो हफ्ते कोई नई फिल्म नहीं आ रही है। यानी ‘धुरंधर 2’ को खेलने के लिए तीन हफ्ते मिल रहे हैं। ऐसा खौफ तो किसी दमदार फिल्म का ही हो सकता है और ऐसे दमखम वाली फिल्में किसी रिव्यू की मोहताज नहीं हुआ करतीं।
चलिए, एक पल को मान लेते हैं (हालांकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं होगा) कि ‘धुरंधर 2’ बहुत खराब बनी होगी, तमाम फिल्म क्रिटिक्स इसे भर-भर कर धोएंगे और एक-एक स्टार देंगे, सोशल मीडिया पर इसे खूब बुरा-बुरा कहा जाएगा, तो क्या आप इसे देखने नहीं जाएंगे…? सच बताइगा, छाती के बाईं तरफ हाथ रख कर… क्या जवाब मिला…? इसीलिए तो पूछ रहा हूं कि ‘धुरंधर 2’ का रिव्यू… आखिर पढ़ना ही कौन चाहता है…?
(दीपक दुआ राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त फिल्म समीक्षक हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। ‘सिनेयात्रा डॉट कॉम’ (www.cineyatra.com) के साथ-साथ विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, वेब-पोर्टल, रेडियो, टी.वी. आदि पर सक्रिय दीपक ‘फिल्म क्रिटिक्स गिल्ड’ के सदस्य भी हैं।)

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