Monday, 11 November 2019

क्या ‘गली बॉय’ ऑस्कर ला पाएगा...!

-दीपक दुआ...
गली बॉयऑस्कर के लिए क्या भेजी गई कि हर साल की तरह आरोप-प्रत्यारोप और विलाप-प्रलाप का  सिलसिला शुरू हो गया। किसी को लगता है कि यह ऑस्कर के लिहाज से बेहद कमजोर फिल्म है तो किसी का कहना है कि इसे भेजे जाने में भाई-भतीजावाद का हाथ है। हालांकि इस तरह की बातें तो अब नई रह गई हैं और ही अनोखी। हर साल ऑस्कर में भेजी जाने वाली फिल्म के समर्थन और मुखालफत में फिल्मी और आम लोग खड़े होते हैं। लेकिन गौर करें तो गली बॉयमें वह सब कुछ है जो ऑस्कर के लिए फिल्म भेजे जाते समय और बाद में ऑस्कर देने के लिए फिल्म चुनते समय देखा जाता है। आइए, ऑस्कर को जरा करीब से जानते हैं।
ऑस्कर अकादमी मंगवाती है फिल्में
ऑस्कर को दुनिया में सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित फिल्म पुरस्कार माना जाता है। अमेरिका की एकेडमी ऑफ मोशन पिक्चर आर्ट्स एंड सांईसेज यानी ऑस्कर अकादमी की तरफ से दिए जाने वाले ये पुरस्कार यूं तो वहीं की फिल्मों के लिए होते हैं लेकिन तमाम अवार्ड्स में से एक पुरस्कार विदेशी भाषा की सर्वश्रेष्ठ फिल्मका भी होता है जिस के लिए ऑस्कर अकादमी दुनिया भर से फिल्में आमंत्रित करती है। हालांकि इस साल से इस पुरस्कार का नाम अंतर्राष्ट्रीय फीचर फिल्मकर दिया है। भारत से ऑस्कर के लिए फिल्म चुन कर भेजने के लिए अधिकृत संस्था फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (एफ.एफ.आई.) है जो देश भर के फिल्म निर्माताओं की संस्थाओं से फिल्में भेजने का आग्रह करती है। अलग-अलग भाषाओं से आने वाली इन फिल्मों को एक जूरी देखती है और फिर किसी एक फिल्म को चुन कर ऑस्कर के लिए भेजा जाता है।
1957 से भारत भेज रहा है फिल्में
मलयालम फिल्म अदामिंते माकन अबू
भारत से पहली फिल्म महबूब खान की मदर इंडिया1957 में ऑस्कर के लिए भेजी गई थी जो आखिरी  पांच में नॉमिनेट भी हुई थी। इसके बाद फाइनल फाइव में नामांकित होने का सम्मान मिला 1988 में भेजी गई मीरा नायर की सलाम बांबेको। नामांकन पाने वाली अपनी तीसरी और अब तक की आखिरी फिल्म आमिर खान की लगानथी जिसे 2001 में भेजा गया था। हाल के बरसों में अदामिंते माकन अबू’, ‘ गुड रोड’, ‘कोर्ट’, ‘विसरनई’, ‘न्यूटनजैसी दमदार फिल्में भी भेजी गईं लेकिन इनमें से कोई भी शॉर्ट-लिस्ट तक हो सकी।
इस साल का हाल
इस साल ऑस्कर के लिए भेजे जाने वाली फिल्म को चुनने का जिम्मा जिस 14 सदस्यों वाली जूरी का था उसकी अध्यक्ष फिल्मकार अपर्णा सेन थीं। कुल जमा 28 फिल्मों में हिन्दी के अलावा तमिल, मलयालम, बांग्ला, गुजराती, नेपाली, असमिया, कन्नड़, तेलुगू जैसी भाषाओं की फिल्में आई थीं जिनमें से जोया अख्तर की गली बॉयको नौ वोट मिले। बाकी के पांच वोट अनुभव सिन्हा निर्देशित हिन्दी फिल्म आर्टिकल 15’, निर्मात्री प्रियंका चोपड़ा की नेपाली भाषा की फिल्म पाहुनाऔर त्यागराजन कुमारराजा निर्देशित तमिल फिल्म सुपर डीलक्समें बंटे। गली बॉय2020 में होने वाले जिस 92वें ऑस्कर समारोह के लिए गई है वहां इसका मुकाबला 92 और देशों से आई फिल्मों से हो रहा है। जाहिर है कि ये इन देशों की बेहतरीन फिल्में ही होंगी। इन में घाना, नाइजीरिया और उजबेकिस्तान ने पहली बार कोई फिल्म भेजी है।
कठिन है ऑस्कर की डगर
ऑस्कर के लिए फिल्म भेज देने भर से ही काम पूरा नहीं हो जाता बल्कि ऑस्कर अकादमी के सदस्यों के बीच अपनी फिल्म का जम कर प्रचार भी करना होता। लगानसे पहले तक हमारे ज्यादातर प्रोड्यूसर सिर्फ रस्मी तौर पर ही अपनी फिल्म वहां भेज रहे थे लेकिन मार्केटिंग के मास्टर आमिर खान ने वहां जाकर जो धमाकेदार प्रचार किया उसी का नतीजा था कि अकादमी के सदस्यों का ध्यान इस फिल्म पर गया और उन्होंने इसे देखने की जहमत उठाई। पहले ऑस्कर अकादमी के सैंकड़ों सदस्य मिल कर नौ फिल्मों को शॉर्ट-लिस्ट किया करते थे लेकिन इस साल से इस लिस्ट में 10 फिल्में होंगी जिनका ऐलान इसी साल 16 दिसंबर को किया जाएगा। उसके बाद अकादमी के सदस्य उन दस फिल्मों में से आखिरी पांच फिल्मों को नॉमिनेट करेंगे जिनकी घोषणा अगले साल 13 जनवरी को की जाएगी और आखिर 9 फरवरी को हॉलीवुड के डॉल्बी थिएटर में होने वाले समारोह में इन पांच में से किसी एक फिल्म को ऑस्कर की सुनहरी मूरत हासिल होगी।
गली बॉयही क्यों
इस बार की जूरी प्रमुख अपर्णा सेन के मुताबिक गली बॉय सिर्फ तकनीकी तौर पर बेहद उन्नत फिल्म है बल्कि इसकी उर्जा चौंकाती है। साथ ही यह भारतीय समाज के उन दो वर्गों को साफ-साफ चिन्हित करती है जिनमें से एक के पास बहुत कुछ है और दूसरा कुछ पाने के लिए संघर्ष कर रहा है। सच तो यह है कि यह वाला ऑस्कर अभी तक जिन फिल्मों को मिला है उनमें से ज्यादातर में किसी अंडरडॉग की ही कहानी थी। यानी कोई ऐसा किरदार जो समाज के निचले, शोषित, वंचित, हाशिये पर बैठे वर्ग का हिस्सा है और अपने संघर्ष जुनून से वह कुछ बड़ा हासिल करता है। याद कीजिए लगानभी ऐसी थी। गली बॉयजिस तरह से मुंबई की झोंपड़पट्टी के दो रैप-गायकों की कहानी को पर्दे पर दिखाती है वह तारीफ ही नहीं, पुरस्कारों की भी हकदार हो जाती है और इसी आस पर इसे ऑस्कर के लिए भी भेजा गया है। तो क्या गली बॉयका टाइम आएगा? क्या इस फिल्म के जरिए ऑस्कर भारत की धरती पर पाएगा? इन सवालों के जवाब पाने के लिए 16 दिसंबर तक तो रुकना ही पड़ेगा। फिल्म 'गली बॉय' का रिव्यू यहां पढ़ें
(नोट-यह लेख संपादित रूप में हरिभूमिके 10 नवंबर, 2019 के अंक में प्रकाशित हुआ है।)
(दीपक दुआ फिल्म समीक्षक पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज़ से घुमक्कड़। अपने ब्लॉग सिनेयात्रा डॉट कॉम (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक फिल्म क्रिटिक्स गिल्डके सदस्य हैं और रेडियो टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)

4 comments:

  1. आदरणीय सर ।
    आपके विस्तृत लेख को पढ़कर बहुत सी जानकारियां सामने आई है।
    विषय से प्रभावित होकर दर्शक के तौर पर जो विचार उत्तपन्न हुए है वह साझा करना चाहूँगा।

    गली बॉय फ़िल्म से अपेक्षाएं अधिक है पर फिल्म की ऑस्कर की डगर बेहद कठिन प्रतीत होती है।
    इस वर्ष कई ऐसी फिल्में थी जो गली बॉय से ज्यादा बेहतर थी पर चूंकि अब गली बॉय को भेजा गया है तो उम्मीदें बरकरार है।

    पर फिल्म का कांसेप्ट मशहूर रैपर एमिनेम की फिल्म 8 mile से काफी प्रभावित दिखता है जिसने सन 2003 में काफी अवार्ड्स बटोरे थे एवं अच्छी खासी लोकप्रियता भी प्राप्त की थी। उसके अलावा भी कई हिप हॉप पर आधारित फिल्में जलवा बिखेर चुकी हैं। तो गली बॉय का विषय बहुत नया नही कहा जा सकता।

    गली बॉय मैंने 2 बार देखी पर कई सारी शंकाये मन में है और मुझे वह फिल्म ऑस्कर अवार्ड के करीब पहुँचती नही दिख रही है।
    हालाँकि उम्मीद फिर भी है।
    😊✍🏻

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  2. आदरणीय सर ।
    आपके विस्तृत लेख को पढ़कर बहुत सी जानकारियां सामने आई है।
    विषय से प्रभावित होकर दर्शक के तौर पर जो विचार उत्तपन्न हुए है वह साझा करना चाहूँगा।

    गली बॉय फ़िल्म से अपेक्षाएं अधिक है पर फिल्म की ऑस्कर की डगर बेहद कठिन प्रतीत होती है।
    इस वर्ष कई ऐसी फिल्में थी जो गली बॉय से ज्यादा बेहतर थी पर चूंकि अब गली बॉय को भेजा गया है तो उम्मीदें बरकरार है।

    पर फिल्म का कांसेप्ट मशहूर रैपर एमिनेम की फिल्म 8 mile से काफी प्रभावित दिखता है जिसने सन 2003 में काफी अवार्ड्स बटोरे थे एवं अच्छी खासी लोकप्रियता भी प्राप्त की थी। उसके अलावा भी कई हिप हॉप पर आधारित फिल्में जलवा बिखेर चुकी हैं। तो गली बॉय का विषय बहुत नया नही कहा जा सकता।

    गली बॉय मैंने 2 बार देखी पर कई सारी शंकाये मन में है और मुझे वह फिल्म ऑस्कर अवार्ड के करीब पहुँचती नही दिख रही है।
    हालाँकि उम्मीद फिर भी है।
    😊✍🏻

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    1. I am agree to ...because of 8 miles i dont think gully boy was a good option ...
      usse better artcle 15 tha ya super deluxe

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  3. आदरणीय सर ।
    आपके विस्तृत लेख को पढ़कर बहुत सी जानकारियां सामने आई है।
    विषय से प्रभावित होकर दर्शक के तौर पर जो विचार उत्तपन्न हुए है वह साझा करना चाहूँगा।

    गली बॉय फ़िल्म से अपेक्षाएं अधिक है पर फिल्म की ऑस्कर की डगर बेहद कठिन प्रतीत होती है।
    इस वर्ष कई ऐसी फिल्में थी जो गली बॉय से ज्यादा बेहतर थी पर चूंकि अब गली बॉय को भेजा गया है तो उम्मीदें बरकरार है।

    पर फिल्म का कांसेप्ट मशहूर रैपर एमिनेम की फिल्म 8 mile से काफी प्रभावित दिखता है जिसने सन 2003 में काफी अवार्ड्स बटोरे थे एवं अच्छी खासी लोकप्रियता भी प्राप्त की थी। उसके अलावा भी कई हिप हॉप पर आधारित फिल्में जलवा बिखेर चुकी हैं। तो गली बॉय का विषय बहुत नया नही कहा जा सकता।

    गली बॉय मैंने 2 बार देखी पर कई सारी शंकाये मन में है और मुझे वह फिल्म ऑस्कर अवार्ड के करीब पहुँचती नही दिख रही है।
    हालाँकि उम्मीद फिर भी है।
    😊✍🏻

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