Wednesday, 20 March 2019

‘केसरी’ फिल्म का ‘चल झूठा’ यानी राकेश चतुर्वेदी

-दीपक दुआ...
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय का पाठ पढ़ कर मुंबई पहुंचे अभिनेता राकेश चतुर्वेदी रंगमंच पर काम करने के अलावा बतौर निर्देशक दो फिल्में-बोलो रामऔर भल्ला एट हल्ला डॉट कॉम’ बना चुके हैं। साथ ही साथ वह बड़े पर्दे पर बतौर अभिनेता भी सक्रिय रहते हैं। पिछले साल वह अक्षय कुमार की पैडमैनमें उस प्रोफेसर के किरदार में आए थे जिनके घर में अक्षय काम करते हैं। अब राकेश अक्षय के साथ केसरीमें रहे हैं। उनसे हुई बातचीत-
-‘केसरीऔर इसमें अपने रोल के बारे में बताएं?
-यह सारागढ़ी की उस लड़ाई की कहानी है जिसमें ब्रिटिश सेना की सिक्ख रेजिमेंट की एक बटालियन के सिर्फ 21 सिपाहियों ने दस हजार अफगानी कबायलियों से टक्कर ली थी और उन्हें धूल चटा दी थी। अक्षय कुमार इस फिल्म में हवलदार ईशर सिंह के रोल में हैं और मेरा रोल एक अफगानी मौलवी का है जो इस सारे घटनाक्रम का एक बहुत ही अहम किरदार है। यह किरदार इतिहास में भी था जिसे डायरेक्टर अनुराग सिंह ने बहुत ही खूबसूरती के साथ फिल्म में दिखाया है। इस समय इससे ज्यादा कुछ कहना सही नहीं होगा। आप इस फिल्म के ट्रेलर में भी मुझे देख सकते हैं जब मेरे एक संवाद पर अक्षय सर मुझे चल झूठाकहते हैं। 'केसरी' का रिव्यू यहाँ पढ़ें...

-‘चल झूठाका यह संवाद तो इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हो रहा है। कुछ मीम्स और चुटकुले भी सामने आने लगे हैं?
-जी हां, हालांकि ऐसा होगा, यह तो हमने बिल्कुल नहीं सोचा था। लेकिन अच्छा लग रहा है कि इस किरदार और इस संवाद को लोगों ने नोटिस किया है। मुझे पूरा यकीन है कि इस फिल्म को भी लोग जरूर पसंद करेंगे और जब आप यह फिल्म देखेंगे तो मेरे किरदार को भी नोटिस किए बिना नहीं रह पाएंगे।

-इस रोल के लिए आपने किस तरह की तैयारी की?
-सिर्फ इसी रोल की ही नहीं बल्कि इस फिल्म के तमाम अहम किरदारों के लिए अनुराग ने हमें काफी तैयारी करवाई। करीब एक महीने की एक वर्कशॉप रखी गई और इस दौरान हम सब ने सिर्फ अपने किरदारों को बखूबी समझा बल्कि दूसरों के द्वारा निभाए जाने वाले किरदारों को लेकर भी हमारे भीतर एक समझ विकसित हुई और जब यह फिल्म शुरू हुई तो फायदा यह हुआ कि तब तक हम लोग इस फिल्म को पूरे का पूरा अपने-अपने जेहन में देख चुके थे जिससे हमें इसे करने में काफी आसानी हुई।

-अक्षय कुमार के साथ पहले पैडमैनऔर अब केसरीमें काम करने के दौरान उनके भीतर आपने क्या कोई फर्क महसूस किया?
-अक्षय सर अपने मजाकिया स्वभाव और शरारतों के लिए जाने जाते हैं। लेकिन जब काम की बारी आती है तो उन जैसा संजीदा इंसान कोई दूसरा नहीं होता। एक बात जो इस बार मैंने नोट की, वो यह कि इस बार वह पैडमैनसे बिल्कुल अलग थे। उनके अंदर पहले से ज्यादा संजीदगी महसूस की मैंने। लग रहा था जैसे केसरीके इस किरदार का संजीदापन उन्होंने अंदर तक महसूस कर लिया है। हम लोग सुबह 7 बजे शूटिंग शुरू कर देते थे और अक्षय सर इससे पहले पूरा मेकअप करवा कर तैयार हो जाते थे। उनके सिर पर भारी पगड़ी, चेहरे पर दाढ़ी होती थी और जब तक शूट चलता था, वह पूरे गैटअप में रहते थे और लंच तक नहीं करते थे। उनके साथ काम करने में जितना मजा आया, उतना ही उनसे सीखने को भी मिला।

-आगे आप क्या कर रहे हैं?
-मेरी दो फिल्में पूरी हो चुकी हैं। एक का नाम है धूर्तऔर दूसरी है अदृश्य बहुत जल्दी मैं बतौर निर्देशक भी अपनी अपनी अगली फिल्म शुरू कर दूंगा।

(दीपक दुआ फिल्म समीक्षक व पत्रकार हैं। 1993 से फिल्म-पत्रकारिता में सक्रिय। मिजाज़ से घुमक्कड़। अपने ब्लॉग सिनेयात्रा डॉट कॉम (www.cineyatra.com) के अलावा विभिन्न समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, न्यूज पोर्टल आदि के लिए नियमित लिखने वाले दीपक रेडियो व टी.वी. से भी जुड़े हुए हैं।)

1 comment:

  1. राकेश भाई को शुभकामनाएं।

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