Saturday, 8 October 2016

बॉक्स-ऑफिस-सितंबर, 2016-पिंक माहौल में धोनी की बाउंड्री

-दीपक दुआ...

सितंबर-यानी स्कूलों में परीक्षाओं का महीना और पितृपक्ष का महीना। ऐसे में वे बड़ी फिल्में आमतौर पर रिलीज नहीं की जातीं जिनमें टिकट-खिड़की पर धूम मचाने की कुव्वत हो। इस महीने फिल्में तो बहुतेरी आईं मगर उनमें से ज्यादातर भीड़ का हिस्सा ही बनी रहीं।

सितंबर के पहले शुक्रवार को सोनाक्षी सिन्हा की अकीराआई। गजिनीऔर हॉलीडे जैसी फिल्में दे चुके निर्देशक . मुरुगादोस की इस फिल्म से बड़ी उम्मीदें लगाना स्वाभाविक
था। लेकिन इस बार वह इन उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए तो कसूर इस फिल्म की कहानी के सूखेपन और स्क्रिप्ट के कच्चेपन का रहा। हालांकि इस फिल्म में लगभग तमाम मसाले थे मगर थोड़े-थोड़े। इसीलिए अकीराऊंट के मुंह में जीरा साबित हुई और बॉक्स-ऑफिस पर पहले हफ्ते में तकरीबन 26 करोड़ की कलैक्शन लेकर फ्लॉप कहलाई। इसी सप्ताह आई जिम्मी शेरगिल वाली यह तो टू मच हो गयाकी बेहद थकी हुई कहानी और वैसे ही प्रस्तुतिकरण ने इसे डुबोने का काम किया। सरकारी पैसे से बनी आइलैंड सिटीकिस आइलैंड पर रिलीज हुई, दर्शकों को कुछ खबर ही नहीं मिली। सनशाइन म्यूजिक टूअर्स एंड ट्रैवल्स’, ‘डार्क चॉकलेट‘, ‘टुडेज लास्ट नाइट’, ‘अम्फार्मंग, ‘जिस्म का नशाजैसी फिल्मों के तो कहीं जिक्र तक नहीं हुए, इन्हें कमाई क्या होती।

सितंबर का दूसरा हफ्ता दो चर्चित फिल्में लेकर आया। सिद्धार्थ मल्होत्रा, कैटरीना कैफ के चमकते नामों और अपने हिट म्यूजिक के दम पर बार बार देखोको वीकएंड के तीन दिन में भले ही करीब 21 करोड़ मिल गए लेकिन इसकी पोल खुल चुकी थी सो बाकी के चार दिनों में यह महज 8 करोड़ की जुटा पाई और नाकामी का धब्बा अपने माथे पर लिए किनारे जा बैठी। घिसी-पिटी कहानी, बेहद लचर स्क्रिप्ट और बेदम संवादों के साथ-साथ कन्फ्यूजन पैदा करते निर्देशन वाली इस फिल्म को समीक्षकों ने बोर बोर देखोकरार दिया और बहुत जल्द दर्शक भी इससे कन्नी काट गए। नवाजुद्दीन सिद्दीकी वाली फ्रीकी अलीसे जुड़ी उम्मीदें इस फिल्म के निर्देशक सोहैल खान ने तोड़ीं। एक अच्छी-भली कहानी को उन्होंने अपने सीमित विजन के चलते बेकार कर डाला और इसकी ऐसी फिरकी ली कि दर्शकों ने इसे नकार दिया। पहले सप्ताह में महज 12 करोड़ का इसका कलैक्शन गवाह है कि इसे कैसे धूल फांकनी पड़ी। इश्क समुंदर’, ‘गर्म रेत’, ‘दिल की उमंगऔर राखी सावंत वाली एक कहानी जूली कीमें ऐसा कुछ नहीं था जो दर्शकों को खींच पाता।

कंटैंट शानदार हो तो लोग सिर्फ तारीफें ही नहीं करते बल्कि उस फिल्म के दीवाने हो उठते हैं। अमिताभ बच्चन, तापसी पन्नू वाली पिंकके साथ यही हुआ। लड़कियों के पहनावे, सोच, शौक और आचरण को लेकर भारतीय समाज जिस कदर तंग सोच रखता आया है और यह सोच जिस तरह से तालिबानी होती जा रही है, उस पर इस फिल्म ने खुल कर और बुलंद आवाज में अपनी बात उठाई और अपने दमदार कंटैंट के बूते बॉक्स-ऑफिस पर भी फतह हासिल की। ऐसी फिल्म का पहले सप्ताह में 36 करोड़ रुपए जुटा लेना भी इसे सफल करार देने के लिए काफी है। फिर दूसरे सप्ताह में भी इसका विजय-रथ चलता रहा और 22 करोड़ की  राशि इसके खाते में जुड़ी। विक्रम भट्ट की राज रीबूटने हॉरर के नाम पर ऐसी चीजें परोसीं कि थिएटर में बैठे दर्शक डरने की बजाय फिल्म का मजाक उड़ाते हुए दिखे। इसे देखते हुए लगता है कि बतौर लेखक-निर्देशक विक्रम भट्ट की कल्पनाशक्ति अब जवाब दे चुकी है। फिर भी छोटे सैंटर्स और सिंगल-स्क्रीन थिएटरों में अपने ब्रांड-नेम राजके चलते इसने दर्शक खींचे और पहले सप्ताह में करीब 22 करोड़ रुपए जमा कर डाले।  लव हंटर्स’, ‘डर्टी प्रेम गलत संबंधकब आईं, कहां आईं, कोई खबर नहीं मिली।

सितंबर के चौथे शुक्रवार को आई ढेरों फिल्मों में से रितेश देशमुख की म्यूजिकल फिल्म बेंजोसबसे आगे रही। पहले हफ्ते का इसका कलैक्शन करीब 9 करोड़ रुपए का रहा। असल में इस फिल्म में म्यूजिक से ज्यादा इधर-उधर की बातें थीं और इसी चक्कर में अच्छी-भली फिल्म का झोलझाल बन गया। श्रेयस तलपड़े की वाह ताजने किसानों की जमीनों का अधिग्रहण करने का मुद्दा तो अच्छा उठाया मगर कमजोर पटकथा और ढीले निर्देशन के चलते यह एक औसत फिल्म ही बन कर रह गई। डेज ऑफ तफरीकहने को तो कॉमेडी फिल्म थी मगर इसने हंसाने की बजाय खिजाने का काम ज्यादा किया। लीना यादव की पाच्र्डको तारीफें तो जम कर मिलीं मगर ऐसे विषयों वाली फेस्टिवल फिल्मोंको आसानी से कमाई नहीं मिल पाती है। दिल साला सनकी’, ‘चापेकर ब्रदर्स’, ‘यह है जजमैंट हैंग्ड टिल डैथजैसी फिल्मों की तो आहट भी सुनाई नहीं दी।

सितंबर का आखिरी शुक्रवार जाते-जाते छक्का मार गया। स्टार क्रिकेटर एम.एस. धोनी पर बनी एम एस धोनी अनटोल्ड स्टोरीको उनके चाहने वालों ने तो चाहा ही, क्रिकेट से दूर रहने वालों का प्यार भी इसे मिला। हालांकि 3 घंटे 10 मिनट की इसकी लंबाई ने कई जगह थकाया लेकिन धोनी के संघर्ष के बहाने इंसानी जीवट को दिखाती इस फिल्म का तालियों के साथ स्वागत हुआ और पहले ही दिन इसने करीब 21 करोड़ की शानदार कलैक्शन करते हुए अपना नाम इस साल की सफल फिल्मों की कतार में लिखवा लिया।

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