Friday, 16 April 2021

गोबर करेंगे अजय देवगन...!

 -दीपक दुआ...
वैसे तो बहुत सारे फिल्मी सितारे और फिल्मकार सिनेमा के नाम पर पर्दे पर गोबर ही करते हैं लेकिन अब सचमुच बड़े पर्दे पर गोबर होगा जिसे अजय देवगन, सिद्धार्थ रॉय कपूर और सबल शेखावत लेकर आएंगे। दरअसलगोबरनाम है उस कॉमेडी फिल्म का जिसे अजय देवगन और सिद्धार्थ रॉय कपूर मिल कर बना रहे हैं। प्रसिद्ध विज्ञापन फिल्ममेकर सबल शेखावत इस फिल्म के डायरेक्टर होंगे। यह फिल्म सबल ने संबित मिश्रा के साथ मिल कर लिखी है। 1990 के दशक के समय में भारत के हिन्दी भाषी इलाके की यह व्यंग्यात्मक कहानी सच्ची घटनाओं से प्रेरित बताई जा रही है जिसमें एक पशु-प्रेमी पशु चिकित्सक को स्थानीय राजकीय अस्पताल में भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है। यह फिल्म भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हुए एक इंसान की हास्यास्पद बहादुरी की यात्रा पर आधारित कॉमेडी होगी।

Tuesday, 13 April 2021

रिव्यू-‘जोजी’ मज़बूत सही मक़बूल नहीं

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
शेक्सपियर के रचे ने फिल्मकारों को हमेशा से लुभाया है। खासतौर से उनकेमैक्बेथके प्रति तो दुनिया भर के फिल्मकारों में आसक्ति रही है। फिर चाहे वह जापान के अकीरा कुरोसावा कीथ्रोन ऑफ ब्लड’ (1957) हो या विशाल भारद्वाज कीमक़बूल’ (2004), इस नाटक का पर्दे पर किया गया चित्रण हर बार कुछ अलग, कुछ गहरा ही रहा है। लेकिन हाल ही में अमेज़न प्राइम पर रिलीज़ हुई मलयालम फिल्मजोजीमें निर्देशक दिलीश पोथान हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाते हैं। एक ऐसी दुनिया, कि अगर बताया जाए तो इसमेंमैक्बेथकी कहानी को पकड़ पाना मुश्किल हो सकता है। दरअसल दिलीश ने मूल कहानी के सार को लेते हुए उसमें अपने डाले किरदारों, उन किरदारों की विशेषताओं, उनकी पृष्ठभूमि और परिस्थितियों के ज़रिए अपनी बात कही है।

Thursday, 8 April 2021

रिव्यू-मनोरंजन का सन्नाटा है ‘साइलेंस’ में

 -दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
ट्रैकिंग के लिए गए चार लड़कों को एक लड़की की लाश मिलती है। लड़की जस्टिस चौधरी की बेटी है। चौधरी के कहने पर ए.सी.पी. अविनाश को इस केस में लगाया जाता है। अविनाश और उसकी टीम के लोग काफी छानबीन करके एक दिन केस क्लोज़ कर ही देते हैं। लेकिन
, केस क्लोज़ होने और केस सॉल्व होने में फर्क होता है, है न...?

Sunday, 4 April 2021

रिव्यू-सुकून से देखो ‘घर पे बताओ’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critics Reviews)
.टी.टी. ने सचमुच सिनेमा का बहुत भला किया है। खासतौर से उन कहानीकारो, फिल्मकारों का जिनके रचे को सिनेमाई गणित के जोड़-तोड़ में थिएटरों में जगह नहीं मिल पाती थी। उन दर्शकों का भी जो कुछ अलग-सा देखना चाहते थे लेकिनकहां और कैसे देखेंकी ऊहापोह में उलझ कर रह जाते थे। यह फिल्म ऐसी ही है जिसे बनाने वालों और देखने वालों को .टी.टी. का शुक्रगुजार हो लेना चाहिए।
 

रजनीकांत-एक आभामंडल का पुरस्कृत होना...

-दीपक दुआ...
मुबारक हो, दादा साहब फाल्के को रजनीकांत पुरस्कार मिला है।
 
यह आलेख 4 अप्रैल केप्रभात खबरमें आया है
अभिनेता रजनीकांत को दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिए जाने की घोषणा के साथ ही उनके बारे में प्रचलित अविश्वसनीयचुटकुलोंकी भीड़ में एक और चुटकुला जुड़ गया। जहां आम सिने-प्रेमियों के लिए सुपरस्टार रजनीकांत को दिया जाने वाला भारतीय फिल्मोद्योग का यह सर्वोच्च पुरस्कार एक सुखद खबर है वहीं रजनी के चाहने वालों के लिए उनकेथलाईवाको मिला यह पुरस्कार असल में इस पुरस्कार का ही सम्मान है। हिन्दी-मराठी के दर्शक-पाठक इस बात पर हैरान हो सकते हैं और चाहें तो क्रोधित भी, लेकिन जिन्हें रजनी सर के प्रशंसकों के बीच उनकी लोकप्रियता का अंदाजा है वे भली भांति जानते हैं कि रजनी के चाहने वालों के लिए रजनी से बढ़ कर कुछ भी नहीं है-फाल्के पुरस्कार तो छोड़िए, स्वयं भगवान भी नहीं।