Sunday, 31 March 2019

इंटरव्यू-मेरा टाइम आ चुका है-बिदिता बाग

-दीपक दुआ...
बाबूमोशाय बंदूकबाजमें नवाजुद्दीन सिद्दिकी की नायिका बन कर आई बिदिता बाग इन दिनों फिर चर्चा में हैं। इस महिला दिवस यानी 8 मार्च को उनकी नई फिल्म शोले गर्लएक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है। बिदिता बहुत उत्साह से इस बारे में बताती हैं, ‘यह फिल्म उन रेशमा पठान की जिंदगी पर बनी है जिन्हें हिन्दी सिनेमा की पहली स्टंट वुमैन माना जाता है। उन्होंने शोलेमें हेमा मालिनी जी की बॉडी डबल के अलावा उस दौर की बहुत सारी नायिकाओं के लिए स्टंट किए थे। मुझे खुशी है कि मुझे इस रोल के लिए चुना गया और इसके कारण अब मेरे प्रोफाइल में शोलेजैसी महान फिल्म का नाम भी जुड़ गया है।

Friday, 29 March 2019

रिव्यू-बच्चों के मतलब की फिल्म ‘जंगली’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
बाप-बेटे में बनती नहीं। बेटा शहर में जानवरों का डॉक्टर है। बाप को जंगल और हाथियों से प्यार है। मां की बरसी पर बेटा आता है। उसी दौरान शिकारी हाथी-दांत के लिए हाथियों को और उन्हें बचाने आए बाप को भी मार डालते हैं। अब बेटे का फर्ज़ बनता है कि वह एक-एक को चुन-चुन कर मारे।

रिव्यू-ओस में भीगी ‘नोटबुक’

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
इंसानी भावनाओं की कहानियां धरती के किसी भी कोने में किसी भी ज़ुबान में कही जाएं, इंसानी मन को एक जैसी ही लगती हैं। 2014 में थाईलैंड में बनी फिल्म टीचर्स डायरी के इस रीमेक को देख कर यही लगता है। श्रीनगर से दूर वूलर झील के बीच एक हाऊसबोट पर अपने मरहूम पिता के शुरू किए स्कूल में मास्टर बन कर पहुंचे कबीर को उससे पहले वहां पढ़ा रही टीचर फिरदौस की डायरी मिलती है। उसे पढ़ते-पढ़ते वह फिरदौस को जानने लगता है, महसूस करने लगता है, उससे प्यार तक करने लगता है। अगले साल वह चला जाता है और फिरदौस लौट आती है। उसी डायरी में लिखी कबीर की बातों से वह भी उससे प्यार करने लगती है। अंत में इन दोनों का मिलन होता है या नहीं, यह फिल्म में ही देखें तो बेहतर होगा।

Thursday, 28 March 2019

रिव्यू-‘द शोले गर्ल’ देखनी चाहिए? जी गुरु जी...!

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
इस फिल्म के नाम से अगर आप यह सोच रहे हैं कि इसमें आपको हेमा मालिनी की ज़िंदगी दिखाई जा रही है तो ज़रा रुकिए। यह कहानी है दरअसल उस स्टंट-बाला की जिसने अपने वक्त की हर छोटी-बड़ी अभिनेत्री की डुप्लिकेट बन कर कैमरे के सामने उनके लिए स्टंट किए, अपनी जान जोखिम में डाली, चोटें खाईं। लेकिन लोगों ने फिल्म देख कर उसकी नहीं बल्कि उन अभिनेत्रियों की ही तारीफ की। लोग उसकी तारीफ करते भी तो कैसे? कोई उसके नाम से वाकिफ था, चेहरे से। शोलेमें हेमा मालिनी के लिए स्टंट करने के बाद उसे शोले गर्लका नाम मिला भी तो सिर्फ इंडस्ट्री के भीतर। सच कहूं तो इस फिल्म के आने तक मैं भी नहीं जानता था कि इस बहादुर औरत का नाम है-रेशमा पठान।

Thursday, 21 March 2019

रिव्यू-निश्चय कर जीतने की कहानी कहती ‘केसरी’

-दीपक दुआ...  (Featured in IMDb Critic Reviews)
सारागढ़ी के किले में जब ब्रिटिश फौज के 21 सिक्ख सिपाहियों को दस हज़ार से ज़्यादा अफगान कबायलियों ने घेर लिया तो उन्होंने झुकने या भागने की बजाय लड़ने का रास्ता चुना। लड़े भी तो, अंग्रेज़ी फौज के लिए, किले के लिए, अपने लिए बल्कि दुनिया को यह बताने के लिए कि हम भले ही गुलाम जिए लेकिन मरे तो आज़ाद मरे, अपनी मर्ज़ी से मरे, वीरों की मौत मरे।

रिव्यू-यह मर्द सर्द है, इसे दर्द नहीं होता

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
बरसों पहले मर्दफिल्म में दारा सिंह ने अपने दुधमुंहे बच्चे की छाती पर चाकू की नोक से मर्द को दर्द नहीं होताउकेर दिया था। ज़रा सोचिए कि अगर किसी को सचमुच दर्द हो तो...? इस फिल्म मर्द को दर्द नहीं होताका हीरो सूर्या ऐसा ही है। बचपन से ही उसे यह अजीब-सी बीमारीहै कि उसे दर्द, चुभन, खुजली जैसा कुछ भी महसूस नहीं होता (हां, बड़े होकर कुछऔर ज़रूर महसूस होता है) कुंगफू-कराटे वाली और बॉलीवुड की घिसी-पिटी एक्शन फिल्में देख कर वह बड़ा होता है और इन फिल्मों के नायकों की तरह समाज में फैले हुए पाप को जला कर राख कर देना चाहता है।

Wednesday, 20 March 2019

‘केसरी’ फिल्म का ‘चल झूठा’ यानी राकेश चतुर्वेदी

-दीपक दुआ...
नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय का पाठ पढ़ कर मुंबई पहुंचे अभिनेता राकेश चतुर्वेदी रंगमंच पर काम करने के अलावा बतौर निर्देशक दो फिल्में-बोलो रामऔर भल्ला एट हल्ला डॉट कॉम’ बना चुके हैं। साथ ही साथ वह बड़े पर्दे पर बतौर अभिनेता भी सक्रिय रहते हैं। पिछले साल वह अक्षय कुमार की पैडमैनमें उस प्रोफेसर के किरदार में आए थे जिनके घर में अक्षय काम करते हैं। अब राकेश अक्षय के साथ केसरीमें रहे हैं। उनसे हुई बातचीत-
-‘केसरीऔर इसमें अपने रोल के बारे में बताएं?
-यह सारागढ़ी की उस लड़ाई की कहानी है जिसमें ब्रिटिश सेना की सिक्ख रेजिमेंट की एक बटालियन के सिर्फ 21 सिपाहियों ने दस हजार अफगानी कबायलियों से टक्कर ली थी और उन्हें धूल चटा दी थी। अक्षय कुमार इस फिल्म में हवलदार ईशर सिंह के रोल में हैं और मेरा रोल एक अफगानी मौलवी का है जो इस सारे घटनाक्रम का एक बहुत ही अहम किरदार है। यह किरदार इतिहास में भी था जिसे डायरेक्टर अनुराग सिंह ने बहुत ही खूबसूरती के साथ फिल्म में दिखाया है। इस समय इससे ज्यादा कुछ कहना सही नहीं होगा। आप इस फिल्म के ट्रेलर में भी मुझे देख सकते हैं जब मेरे एक संवाद पर अक्षय सर मुझे चल झूठाकहते हैं। 'केसरी' का रिव्यू यहाँ पढ़ें...