Sunday, 27 January 2019

रिव्यू-‘ठाकरे’-मुंबई का किंग कौन...?

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
महाराष्ट्र की राजनीति और वहां के लोगों के जीवन में दिवंगत बाला साहब ठाकरे का होना कितना महत्वपूर्ण था, यह महाराष्ट्र से दूर बैठे हम जैसे लोगों के लिए समझ और महसूस कर पाना शायद असंभव है। यह फिल्म हमारी उसी समझ को बढ़ाती है और हमें उन भावों को महसूस करने में मदद करती है जिनसे होकर कभी महाराष्ट्र के वे लोग गुज़रे होंगे जिन्होंने बाला साहब को करीब से देखा या जिन पर उनके होने से कोई फर्क पड़ा।

Saturday, 26 January 2019

रिव्यू-‘मणिकर्णिका’-वो तो झांसी वाली रानी थी

-दीपक दुआ... (Featured in IMDb Critic Reviews)
रानी लक्ष्मीबाई की वीरता के किस्सों ने रानी को सचमुच हमारे जेहन में किसी मनुज नहीं बल्कि अवतारी का दर्जा दिया हुआ है। ऐसी रानी की कहानी पर कोई फिल्म बन कर आए तो ज़ाहिर है कि उसमें इतिहास में बयान वे उजले पक्ष तो होंगे ही जिन्होंने उन्हें एक असाधारण वीरांगना का दर्जा दिया, साथ ही दंतकथाओं के उन हिस्सों का होना भी लाजिमी है जिन्होंने रानी को आज भी हमारे दिलों में जीवित रखा हुआ है। इस फिल्म में वो सब है जो आप देखना चाहते हैं। लेकिन साथ ही ऐसा भी बहुत कुछ है जो इसे बनाने वाले आपको दिखाना चाहते हैं। फिर चाहे वो इतिहास का हिस्सा हो या नहीं।

Tuesday, 22 January 2019

ऑस्कर के फाइनल नॉमिनेशन आ गए...

-दीपक दुआ...
ऑस्कर अकादमी ने 2019 में दिए जाने वाले
ऑस्कर पुरस्कारों के फाइनल नॉमिनेशन घोषित कर दिए हैं। ऑस्कर से आई मेल अंग्रेज़ी में है और वैसे की वैसे नीचे दी गई हैं...

91ST OSCARS® NOMINATIONS ANNOUNCED

LOS ANGELES, CA – Actor-comedian and Oscar®–nominated writer Kumail Nanjiani and actress–producer–director Tracee Ellis Ross announced the 91st Oscars® nominations today (January 22), live from the Academy’s headquarters in Beverly Hills via a global live stream on Oscar.comOscars.org, the Academy’s digital platforms, a satellite feed and broadcast media.

Thursday, 17 January 2019

रिव्यू-‘बॉम्बेरिया’... बेवकूफेरिया... बर्बादेरिया...

-दीपक दुआ...
इस रिव्यू की ऊल-जलूल हैडिंग पढ़ कर आप अगर सोच रहे हैं कि यह क्या बला है, तो बता दें कि यह फिल्म यानी बॉम्बेरियाभी ऐसी ही है-ऊल-जलूल, बिना सिर-पैर की, बेमतलब, बेमायने, बेवकूफाना, बर्बादाना...!

Friday, 11 January 2019

रिव्यू-किसे चाहिए ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’

-दीपक दुआ...
दस साल तक देश के प्रधानमंत्री रहने के बावजूद मनमोहन सिंह के लिए एक आम भारतीय के मन में यही सोच है कि वो महज एक कठपुतली थे जिन्हें कांग्रेस पार्टी ने अपने हित साधने के लिए कुर्सी सौंपी थी। उनके मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने उन पर एक किताब एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टरलिखी थी जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने प्रचार पाने का हथकंडा कह कर नकार दिया था। मगर जानकारों का कहना है वह किताब सच्चाइयों का पुलिंदा है-पूरी नहीं तो काफी हद तक ही सही। यह फिल्म उसी किताब पर आधारित है। मगर पूरी तरह से नहीं।

Tuesday, 8 January 2019

रिव्यू-ज़रूरी हैं ‘उरी’ जैसी फिल्में

-दीपक दुआ...
कुछ महीने पहले राज़ीके रिव्यू (राज़ी का रिव्यू) में मैंने लिखा था-राज़ीजैसी फिल्में बननी चाहिएं। ऐसी कहानियां कही जानी चाहिएं। ये हमारी सोच को उद्वेलित भले करें, उसे प्रभावित ज़रूर करती हैं। फिर परमाणु- स्टोरी ऑफ पोखरणके रिव्यू (परमाणु का रिव्यू) में मेरी लाइनें थीं-अखबार में जब आप पढ़ते हैं कि भारत ने परमाणु परीक्षण कियातो इसके पीछे असल में कितने सारे लोगों की मेहनत लगी होती है। कितने सारे लोगों ने उसमें अपने और अपनों के सपनों की आहुति दी होती है। और बस, यहीं आकर यह एक ज़रूरी फिल्म हो जाती है। उरी- सर्जिकल स्ट्राइकइसी कड़ी की अगली फिल्म है जो सिर्फ आपको उद्वेलित करती है बल्कि अपने ज़रूरी होने का अहसास भी कराती है।