Sunday, 30 April 2017

फुल स्पीड से आया ‘जट्टू इंजीनियर’


-दीपक दुआ...

अभी दो महीने भी नहीं हुए हैं जब हम लोग हरियाणा के सिरसा में बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह की पिछली फिल्म हिन्द का नापाक को जवाबकी कामयाबी का जश्न मनाने और उनकी अगली फिल्म जट्टू इंजीनियरके मुहूर्त पर पहुंचे थे। और अब देखिए, यह फिल्म सिर्फ पूरी हो चुकी है बल्कि बाबा ने 19 मई को इसे रिलीज करने का ऐलान भी कर दिया है।
लोगों को स्वच्छता और शिक्षा का संदेश देने के लिए बनी यह एक कॉमेडी फिल्म है जिसमें एक ऐसे गांव टटिया कर की कहानी दिखाई गई है जहां के रहने वाले बेहद आलसी, निखट्टू, आवारा, नशेड़ी किस्म के इंसान हैं। गंदगी में रहना इन्हें अच्छा लगता है और अच्छी चीजों से इन्हें कोई वास्ता ही नहीं है। बाबा गुरमीत राम रहीम सिंह इसमें डबल रोल कर रहे हैं। वह बताते हैं कि एक रोल में तो वह जुगाड़ करने में माहिर जट्टू बने हैं और दूसरे में एक राजपूत टीचर शक्ति सिंह सिसोदिया जो इस गांव में आकर गांव और यहां रहने वालों की दशा सुधारता है। वह बताते हैं कि इस फिल्म में हास्य-व्यंग्य और संवेदना के जरिए सामाजिक संदेश देने की कोशिश की गई है।

फिल्म का डायरेक्शन खुद बाबा और उनकी बेटी हनीप्रीत ने किया है। दिलचस्प बात यह है कि बाबा ने जहां अपनी पिछली फिल्म में 42 काम खुद किए थे वहीं इस बार उन्होंने खुद पर 43 जिम्मेदारियां लीं जिनमें स्क्रिप्ट-राइटिंग, गीत लिखना, संगीत, सेट डिजाइनिंग, आर्ट-डायरेक्शन, संपादन, कोरियोग्राफी जैसे तमाम काम शामिल हैं। बाबा ने इधर एक के बाद एक इस फिल्म के तीन पोस्टर जारी किए जिसके बाद फिल्म का ट्रेलर भी लांच किया गया।

Friday, 28 April 2017

रिव्यू-बाहुबली 2... अद्भुत, अतुल्य, अकल्पनीय


-दीपक दुआ...

कहां है हॉलीवुड? सुन लो और कान खोल कर सुन लो कि अब हमारे पास बाहुबली 2’ जैसी एक फिल्म है जो तुम्हारी फिल्मों को न सिर्फ टक्कर देती है बल्कि कहीं न कहीं उनसे इक्कीस ही साबित होती है। यकीन न आए तो देख लो और आंखें मसल कर देख लो कि हमारे पास भी अब वह काबिलियत और कुव्वत है जिस पर कभी सिर्फ तुम्हारी बपौती हुआ करती थी।

जी हां, ‘बाहुबलीदेखते समय अगर आपने सोचा था कि इतनी भव्यता तो अब तक सिर्फ हॉलीवुड की फिल्मों में ही होती थी और हमने उसका जवाब दे दिया है तो यकीन मानिए कि बाहुबली 2’ को देखते समय आपका सिर गर्व से ऊंचा हो जाएगा, कंधे चौड़े होंगे, छाती दम भर फूलेगी और मन कहेगा कि उतने ही जोर से चीख कर आप भारतीय सिनेमा की जय कहें जितने जोर से सामने पर्दे पर जय माहिष्मती का उद्घोष होता है।

यह फिल्म सिर्फ कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?’ का ही जवाब नहीं देती है बल्कि यह उन तमाम लोगों के उन ढेरों सवालों के जवाब भी देती है जो भारतीय सिनेमा पर अक्सर उठाए जाते हैं। कहीं-कहीं मामूली तौर से हल्की पड़ती यह फिल्म हिन्दी फिल्मों के कारोबारियों के लिए एक उम्दा सबक है कि अब राग-विलाप छोड़ कर अपने यहां की प्रतिभाओं को छूट और इज्जत दीजिए। एक सबक दर्शकों के लिए भी है कि जरा आसपास नजरें दौड़ाइए, भव्य फिल्म आए सिर्फ तभी नहीं, बल्कि दूसरी भाषाओं में बनने वाली अच्छी फिल्में ढूंढिए, देखिए, सराहिए ताकि हिन्दी में भी और बेहतर सिनेमा बन कर आ सके।

बाहुबली 2’ को बिना सवाल उठाए देखिए और फख्र कीजिए कि आप ऐसे समय में हैं जब यह फिल्म बन कर आई है।

अपनी रेटिंग-चार स्टार

Thursday, 27 April 2017

‘बाहुबली 2’ का रिव्यू... कौन पढ़ना चाहता है...?


-दीपक दुआ...

क्या सचमुच आप जानना चाहते हैं कि बाहुबली 2’ कैसी फिल्म है? क्या आप बाकी फिल्मों की तरह इसका भी रिव्यू पढ़ कर ही यह फैसला करेंगे कि इसे देखा जाए या नहीं? और मान लीजिए, यह फिल्म सचमुच खराब हुई, समीक्षकों ने इसकी बुराई करते हुए इसे सिर्फ 1-2 स्टार दिए तो क्या आप इसे बिल्कुल नहीं देखेंगे?

इन सवालों पर गौर करें तो पता चलता है कि इनमें से ज्यादातर सवाल अब बेमतलब हो चुके हैं। कोई माने या माने लेकिन सच यही है कि किसी भी छोटी-बड़ी फिल्म के आने पर उसे देखने या देखने का दर्शकों का इरादा दूसरों से मिलने वाले फीडबैक से काफी ज्यादा प्रभावित होता है। यह फीडबैक पेशेवर फिल्म समीक्षकों की तरफ से आए, यार-दोस्तों से, फेसबुक-ट्विटर जैसे सोशल मीडिया पर मिले या फिर किसी और स्रोत से, अगर पता चल जाए कि जिस फिल्म को हम देखने की योजना बना रहे हैं, वह काफी खराब है तो बहुतेरे दर्शक टिकट खरीद कर उसे देखने का इरादा रद्द कर देते हैं। इसी तरह से किसी फिल्म को लेकर असमंजस में पड़े दर्शक अक्सर उसकी तारीफें सुन कर उसे देखने चल पड़ते हैं।

लेकिन कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो समीक्षाओं के असर से परे होती हैं। ये फिल्में वे होती हैं जिन्हें देखने का इरादा दर्शक पहले से ही कर चुके होते हैं और उन्हें सचमुच इस बात से कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि कोई उस फिल्म के बारे में क्या कह रहा है। बाहुबली 2’ भी ऐसी ही फिल्म है। 10 जुलाई, 2015 को जब बाहुबलीरिलीज हुई थी तो इसने आते ही कमाई के नए रिकॉर्ड बनाने शुरू कर दिए थे। पहले दिन करीब साढ़े पांच करोड़ की कलैक्शन इससे पहले किसी भी डब फिल्म को हिन्दी के बाजार में नहीं मिली थी। पहले तीन दिन में करीब सवा बाईस करोड़ रुपए बटोर कर इस फिल्म ने जता दिया था कि इसमें कितना दमखम है। इससे पहले रजनीकांत की रोबोटएक हफ्ते में 11 करोड़ और कुल जमा 18 करोड़ की कलैक्शन करके हिन्दी में डब हुई फिल्मों में सबसे आगे खड़ी हुई थी। यहां यह भी गौरतलब है कि रोबोटमें जहां रजनीकांत, ऐश्वर्या राय बच्चन, डैनी डेंज़ोंग्पा जैसे हिन्दी दर्शकों के जाने-पहचाने चेहरे थे वहीं बाहुबलीके ज्यादातर कलाकारों की यहां कोई खास पहचान और मार्किट थी और ही अभी तक बन पाई है। ऐसे में सिर्फ अपने कंटेंट के दम पर बाहुबलीचली और अब उसी भरोसे पर लोग बाहुबली 2’ का इंतजार कर रहे हैं।

बाहुबली 2’ के इस इंतजार के पीछे भले ही कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा...?’ वाले यक्ष-प्रश्न का जवाब तलाशने की उत्सुकता हो लेकिन असल वजह यह है कि बाहुबलीदर्शकों को अपने जिस शानदार और भव्य लोक में ले गई थी दर्शक एक बार फिर उस जगह पर जाना चाहते हैं और देखना चाहते हैं कि कैसे महेंद्र बाहुबली अपने पिता अमरेंद्र बाहुबली की हत्या का बदला लेगा और भल्लाल देव और उसके साथियों को मौत के घाट उतारेगा। हालांकि गौरतलब यह भी है कि इस फिल्म की कहानी तो नई थी ही अनोखी। महाभारतसे प्रेरित कहानी और लगभग वैसे ही किरदारों को लेकर निर्देशक एस.एस. राजमौली ने पर्दे पर जो अद्भुत संसार रचा वह दर्शकों को इस कदर मोहित कर गया कि अब चाहे जो हो जाए, इसका पहला भाग देख चुके दर्शक इसके दूसरे भाग को देखे बिना नहीं मानेंगे, यह तय है।

तो बताइए, क्या अब भी आपको बाहुबली 2’ के रिव्यू का इंतजार है...?